शास्त्रों में कहा गया है कि निष्काम भाव और सही विधि से किया गया छोटा सा पूजन भी अनंत फल प्रदान करता है। कई बार जानकारी के अभाव में अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनसे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। आइए जानते हैं नित्य पूजा-पाठ से जुड़े वे नियम जिनका ध्यान हर गृहस्थ को रखना चाहिए।
पूजा-पाठ के 5 जरूरी वैदिक नियम
1. दीपक से दीपक कभी न जलाएँ: अग्नि पुराण और निर्णय सिंधु के अनुसार एक दीपक से दूसरा दीपक जलाना वर्जित माना गया है। ऐसा करने से रोग और कलह की आशंका रहती है।
2. खंडित चावल (अक्षत) का निषेध: भगवान को हमेशा साबुत, बिना टूटे हुए चावल ही अर्पित करने चाहिए। टूटे हुए चावल अर्पण करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।
3. शंख का जल सूर्य देव और शिव जी को न दें: शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव को तांबे के लोटे से और शिव जी को तांबे या पीतल के पात्र से जल अर्पित किया जाता है, शंख से इन दोनों पर जल चढ़ाना वर्जित है।
4. तुलसी दल तोड़ने का समय: द्वादशी, संक्रांति, रविवार और संध्याकाल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। साथ ही बिना स्नान किए तुलसी स्पर्श न करें।
5. आरती के बाद आचमन और समर्पण: आरती पूर्ण होने के बाद दाहिने हाथ से जल घुमाकर धरती पर छोड़ें और “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” भाव से प्रभु को नमन करें।
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