वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा में घर के मुख्य द्वार को केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और माँ लक्ष्मी के आगमन का प्रमुख केंद्र माना गया है। यदि मुख्य द्वार पर कुछ खास मांगलिक और वैदिक प्रतीकों को सही विधि से स्थापित किया जाए, तो नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति व बरकत बनी रहती है।
मुख्य द्वार के 4 अत्यंत शुभ मांगलिक प्रतीक
1. स्वास्तिक का पावन चिह्न: स्वास्तिक को भगवान गणेश और ऋद्धि-सिद्धि का साक्षात स्वरूप माना जाता है। मुख्य द्वार के दोनों ओर रोली या सिंदूर से 9 अंगुल लंबा और 9 अंगुल चौड़ा स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं और घर पर किसी की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती।
2. आम या अशोक के पत्तों का तोरण: किसी भी शुभ कार्य या नित्य रूप से मुख्य द्वार पर आम या अशोक के ताजे पत्तों का बंधनवार (तोरण) बाँधना अत्यंत शुभ होता है। यह घर के भीतर आने वाली वायु को शुद्ध करता है और नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है।
3. तांबे के लोटे या उरली में जल और ताजे पुष्प: मुख्य द्वार के पास एक स्वच्छ पात्र (तांबे का लोटा या पीतल की उरली) में स्वच्छ जल भरकर उसमें ताजे पीले या लाल फूल रखें। इससे घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
4. माँ लक्ष्मी के चरण चिह्न (भीतर की ओर): मुख्य द्वार की चौखट पर माँ लक्ष्मी के चरण चिह्न ऐसे लगाएं कि उनकी दिशा घर के अंदर की तरफ आती हुई प्रतीत हो। यह धन के स्थायी वास और समृद्धि का प्रतीक है।
मुख्य द्वार पर क्या न रखें?
जूते-चप्पल का ढेर या टूटी-फूटी वस्तुएं कभी मुख्य दरवाजे के सामने न रखें।
मुख्य द्वार के ठीक सामने कूड़ेदान या झाड़ू खुला न छोड़ें।
मुख्य दरवाजे को खोलते या बंद करते समय कर्कश आवाज़ (चर्र-चर्र) नहीं आनी चाहिए, यदि आती हो तो तुरंत तेल डालें।
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