वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव आता है, तो जीवन में मानसिक तनाव, कार्यक्षेत्र में रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सही नियमों और सात्विक उपायों के पालन से शनि देव के अनिष्ट प्रभावों को शांत किया जा सकता है।
शनि देव को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय
1. नित्य दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ: शनिवार की संध्या समय पीपल के वृक्ष के पास या घर के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाकर दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से विशेष मानसिक शांति प्राप्त होती है।
2. छाया दान की विधि: शनिवार के दिन एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को किसी जरूरतमंद को या शनि मंदिर में दान कर दें।
3. हनुमान जी की नित्य आराधना: शास्त्रों में उल्लेख है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कभी कष्ट नहीं देते। मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ करें।
4. असहाय एवं जरूरतमंदों की सेवा: शनि देव सेवा भाव से सबसे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। दिव्यांगों, सफाईकर्मियों और वृद्धजनों को काले वस्त्र, जूते या भोजन भेंट करें।
5. महामृत्युंजय मंत्र का जप: साढ़ेसाती के दौरान यदि स्वास्थ्य को लेकर कष्ट हो, तो रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन कम से कम 1 माला महामृत्युंजय मंत्र का जप अवश्य करें।
साढ़ेसाती के दौरान क्या न करें?
मदिरा, तामसिक भोजन और जुए जैसी प्रवृत्तियों से पूर्णतः दूर रहें।
किसी के साथ छल-कपट या अपने अधीनस्थों (कर्मचारियों/मजदूरों) का हक न मारें।
शनिवार के दिन लोहा, सरसों का तेल या काले तिल खरीदकर घर न लाएँ (दान करना शुभ है, खरीदना वर्जित)।
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