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मासिक राशिफल नवंबर 2026: सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा यह महीना? जानें करियर, धन, परिवार और उन्नति के सुनहरे अवसर

कार्तिक मास के पावन प्रभाव और देव प्रबोधिनी एकादशी के शुभारंभ के साथ नवंबर 2026 का महीना सभी राशियों के लिए नई ऊर्जा, आशा और नए अवसरों की सौगात लेकर आ रहा है। इस माह ग्रहों की चाल और सूर्य देव का राशि परिवर्तन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों—विशेष रूप से करियर की प्रगति, आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक सौहार्द—में सकारात्मक मोड़ देने वाला सिद्ध होगा।

आइए जानते हैं कि मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों के लिए नवंबर 2026 का महीना क्या विशेष वरदान लेकर आ रहा है।

1. मेष राशि (Aries)

  • करियर व व्यापार: कार्यक्षेत्र में आपका पराक्रम और नेतृत्व क्षमता चरम पर रहेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का पूर्ण सहयोग मिलेगा और पदोन्नति के योग बनेंगे।
  • आर्थिक पक्ष: रुका हुआ धन वापस मिलने से बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। नई साझेदारी से व्यापार में बड़ा मुनाफा हो सकता है।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। जीवनसाथी के सहयोग से किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना सफल होगी।
  • शुभ उपाय: प्रतिदिन सूर्य देव को तांबे के लोटे से रोली मिश्रित जल अर्पित करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 9 | लाल रंग।

2. वृषभ राशि (Taurus)

  • करियर व व्यापार: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का पूरा प्रतिफल मिलेगा। रचनात्मक और मीडिया/कला से जुड़े जातकों को नए प्रोजेक्ट मिलेंगे।
  • आर्थिक पक्ष: भौतिक सुख-सुविधाओं और आभूषण/वाहन की खरीद पर शुभ व्यय होगा। आय के नए स्रोत बनेंगे।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: घर में मांगलिक आयोजनों की रूपरेखा बनेगी। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी और आपसी विश्वास मजबूत होगा।
  • शुभ उपाय: शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को सफेद मिष्ठान्न अथवा खीर का भोग लगाएं।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 6 | चमकीला सफेद/गुलाबी रंग।

3. मिथुन राशि (Gemini)

  • करियर व व्यापार: आपकी संवाद कला और बौद्धिक निर्णय कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता दिलाएंगे। नौकरी में स्थानांतरण अथवा नई नौकरी की तलाश पूरी होगी।
  • आर्थिक पक्ष: व्यापारिक लेन-देन में लाभ के योग हैं। शेयर या पूर्व में किए गए निवेश से बेहतर रिटर्न मिलेगा।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा। परिवार के साथ किसी मनोरंजक अथवा तीर्थ यात्रा पर जाने का अवसर मिलेगा।
  • शुभ उपाय: बुधवार को भगवान श्रीगणेश को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 5 | हरा रंग।

4. कर्क राशि (Cancer)

  • करियर व व्यापार: मानसिक तनाव समाप्त होगा और कार्यक्षेत्र में आपकी एकाग्रता बढ़ेगी। सहकर्मियों का सहयोग आपके आत्मविश्वास को दोगुना करेगा।
  • आर्थिक पक्ष: पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक समाचार मिलेगा। बचत योजनाओं में निवेश भविष्य के लिए लाभकारी रहेगा।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: माता जी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होने से मन अत्यंत प्रसन्न रहेगा।
  • शुभ उपाय: सोमवार के दिन शिवलिंग पर कच्चा दूध और अक्षत अर्पित करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 2 | मोती जैसा श्वेत या क्रीम रंग।

5. सिंह राशि (Leo)

  • करियर व व्यापार: समाज और कार्यक्षेत्र में मान-प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि होगी। सरकारी तंत्र अथवा उच्चाधिकारियों से जुड़े अटके कार्य तीव्र गति से पूरे होंगे।
  • आर्थिक पक्ष: आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहेगी। व्यापार विस्तार के लिए की गई यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: परिवार में आपका सम्मान बढ़ेगा और सभी आपके निर्णयों की सराहना करेंगे। वैवाहिक जीवन में प्रेम व स्थिरता बनी रहेगी।
  • शुभ उपाय: प्रतिदिन प्रातः आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 1 | नारंगी अथवा सुनहरा रंग।

6. कन्या राशि (Virgo)

  • करियर व व्यापार: आपकी कार्यकुशलता और विश्लेषणात्मक क्षमता की सराहना होगी। नई तकनीकी या कौशल सीखने से करियर में बड़ा उछाल आएगा।
  • आर्थिक पक्ष: धन आगमन के रास्ते खुलेंगे। कर्ज या पुरानी देनदारियों से मुक्ति मिलने की दिशा में ठोस कदम बढ़ेंगे।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: मित्रों और प्रियजनों का साथ मिलेगा। घर-परिवार में मांगलिक उत्सव का वातावरण रहेगा।
  • शुभ उपाय: गाय को नियमित रूप से हरा चारा अथवा भीगी हुई मूंग की दाल खिलाएं।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 5 | गहरा हरा अथवा हल्का नीला रंग।

7. तुला राशि (Libra)

  • करियर व व्यापार: साझेदारी के कार्यों में उत्तम लाभ होगा। विदेश व्यापार या बाहरी संपर्कों से लाभ के प्रबल योग हैं। पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
  • आर्थिक पक्ष: आर्थिक दृष्टि से यह महीना बेहद अनुकूल रहेगा। लंबे समय से अटकी हुई कोई वित्तीय डील इस माह फाइनल हो सकती है।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: वैवाहिक जीवन अत्यंत सुखद रहेगा। अविवाहित जातकों के लिए विवाह के उत्तम प्रस्ताव आ सकते हैं।
  • शुभ उपाय: श्री सूक्त का नित्य पाठ करें और सुगंधित इत्र का प्रयोग करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 7 | आसमानी अथवा सफेद रंग।

8. वृश्चिक राशि (Scorpio)

  • करियर व व्यापार: आत्मविश्वास और ऊर्जा में जबरदस्त उछाल आएगा। जो कार्य पिछले कई महीनों से रुके हुए थे, वे अचानक गति पकड़ेंगे।
  • आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। भूमि, भवन अथवा अचल संपत्ति में निवेश के लिए समय सर्वोत्तम है।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: पारिवारिक वातावरण उल्लासपूर्ण रहेगा। जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बढ़ेगा और मानसिक शांति प्राप्त होगी।
  • शुभ उपाय: मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और सिन्दूर अर्पित करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 8 | गहरा लाल अथवा मैरून रंग।

9. धनु राशि (Sagittarius)

  • करियर व व्यापार: भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। आध्यात्मिक और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए समय स्वर्णिम रहेगा। विदेश यात्रा या लंबी दूरी की लाभकारी यात्राएं संभव हैं।
  • आर्थिक पक्ष: धार्मिक कार्यों और दान-पुण्य में मन लगेगा, जिसके प्रभाव से धन और वैभव में निरंतर बरकत बनी रहेगी।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: घर के वरिष्ठ सदस्यों और गुरुजनों का आशीर्वाद मिलेगा। पारिवारिक कलह समाप्त होकर सौहार्द स्थापित होगा।
  • शुभ उपाय: गुरुवार के दिन माथे पर केसर/हल्दी का तिलक लगाएं और पीले फल का दान करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 3 | पीला रंग।

10. मकर राशि (Capricorn)

  • करियर व व्यापार: कर्मक्षेत्र में आपके धैर्य और निरंतर प्रयासों की जीत होगी। बड़ी जिम्मेदारियां मिलने के साथ ही प्रभाव क्षेत्र में विस्तार होगा।
  • आर्थिक पक्ष: आय में निरंतरता बनी रहेगी। पुराने संपर्कों और मित्रों की सहायता से नया व्यावसायिक अनुबंध मिल सकता है।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: परिवार के सदस्यों का समर्थन आपको मजबूती देगा। जीवनसाथी की सलाह किसी बड़े निर्णय में निर्णायक सिद्ध होगी।
  • शुभ उपाय: शनिवार की संध्या पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 4 | गहरा नीला अथवा ग्रे रंग।

11. कुंभ राशि (Aquarius)

  • करियर व व्यापार: नए विचार और नवाचार कार्यक्षेत्र में आपको दूसरों से आगे रखेंगे। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत लोगों को प्रमोशन अथवा ऑनसाइट अवसर मिल सकते हैं।
  • आर्थिक पक्ष: अप्रत्याशित वित्तीय स्रोतों से लाभ होगा। आर्थिक योजनाओं को व्यवस्थित रूप देने में सफलता मिलेगी।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: मित्रों का पूर्ण सहयोग मिलेगा। दांपत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम बढ़ेगा।
  • शुभ उपाय: शनिवार को जरूरतमंदों को कंबल अथवा काले तिल का दान करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 8 | जामुनी अथवा नेवी ब्लू रंग।

12. मीन राशि (Pisces)

  • करियर व व्यापार: कार्यक्षेत्र में गुरु कृपा से नए मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरीपेशा लोगों के अधिकार बढ़ेंगे और व्यापार में मान-सम्मान के साथ मुनाफा भी बढ़ेगा।
  • आर्थिक पक्ष: धन संचय में सफलता मिलेगी। पूर्व में किए गए निवेशों से संतोषजनक लाभ प्राप्त होगा।
  • पारिवारिक व प्रेम जीवन: संतान की ओर से गौरवशाली उपलब्धि सुनने को मिलेगी। वैवाहिक और घरेलू जीवन में सुख, शांति व मांगलिक उत्साह रहेगा।
  • शुभ उपाय: गुरुवार को भगवान सत्यनारायण अथवा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भाग्यशाली अंक एवं रंग: अंक 3 | सुनहरा अथवा पीला रंग।

नवंबर 2026: व्यक्तिगत कुंडली एवं गोचर फलादेश प्राप्त करें

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व, पूजा विधि एवं अनुष्ठान

पापांकुशा एकादशी 2026: समस्त पापों का नाश करने वाला महाव्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का समय

सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘पापांकुशा एकादशी’ कहा जाता है। यह एकादशी विजयादशमी (दशहरे) के ठीक अगले दिन आती है। पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, जिस प्रकार हाथी को वश में करने के लिए अंकुश का प्रयोग किया जाता है, ठीक उसी प्रकार यह एकादशी मनुष्य के कायिक, वाचिक और मानसिक पापों पर अंकुश लगाकर उनका नाश कर देती है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के चतुर्भुज ‘पद्मनाभ’ स्वरूप की विधिवत आराधना की जाती है। मान्यता है कि जो जातक निष्काम भाव से इस व्रत का पालन करता है, उसे यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वह अंत काल में वैकुंठ लोक को प्राप्त करता है।

पापांकुशा एकादशी का पौराणिक महत्व

पद्म पुराण में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस एकादशी की महिमा बताते हुए कहा है:

  • त्रिकुल उद्धारिणी तिथि: जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत रखता है, वह अपने मातृपक्ष की दस पीढ़ियों, पितृपक्ष की दस पीढ़ियों और पत्नी/पति के पक्ष की दस पीढ़ियों का उद्धार कर देता है।
  • अश्वमेध और सूर्यग्रहण स्नान के समान पुण्य: शास्त्रों में वर्णित है कि हजारों अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ करने से जो फल प्राप्त होता है, वह पापांकुशा एकादशी के व्रत के सोलहवें अंश के बराबर भी नहीं है।
  • आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति: यह व्रत न केवल परलोक सुधारता है, बल्कि इस लोक में उत्तम स्वास्थ्य, सुयोग्य संतान, धन-ऐश्वर्य और मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

पापांकुशा एकादशी पूजन विधि

  1. प्रातः संकल्प एवं शुद्धि: एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद हाथ में जल, पीले पुष्प, अक्षत और सिक्का लेकर भगवान पद्मनाभ के सम्मुख व्रत का संकल्प लें।
  2. कलश व श्रीहरि स्थापना: पूजा की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु अथवा लड्डू गोपाल जी की प्रतिमा स्थापित करें। यदि संभव हो तो पास में एक छोटा मंगल कलश भी स्थापित करें।
  3. षोडशोपचार पूजन: भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात चंदन, रोली, पीले पुष्प, पीले फल, जनेऊ और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि बिना तुलसी दल के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते (एकादशी के दिन तुलसी दल न तोड़ें, एक दिन पहले तोड़ा हुआ पत्ता प्रयोग करें)।
  4. दीपक एवं मंत्र जप: गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-दीप दिखाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की कम से कम 5 माला जपें। इस दिन ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
  5. रात्रि जागरण एवं भजन: एकादशी की रात्रि में सोना वर्जित माना गया है। रात्रि में भगवान के भजनों का संकीर्तन करें और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें।

संक्षिप्त पौराणिक व्रत कथा

प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर ‘क्रोधन’ नाम का एक अत्यंत क्रूर और अधर्मी बहेलिया रहता था। उसने अपने संपूर्ण जीवन में हिंसा, मद्यपान और पाप कर्म ही किए थे। जब उसका अंतिम समय निकट आया, तो यमराज के दूतों को देखकर वह भयभीत हो गया। मृत्यु के भय से कांपता हुआ वह महर्षि अंगिरा के आश्रम में जा पहुंचा और उनके चरणों में गिरकर रोने लगा—“हे मुनिवर! मैंने जीवन भर केवल पाप किए हैं। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मैं नरक की घोर यातनाओं से बच सकूं।”

महर्षि अंगिरा ने उसकी दयनीय दशा देखकर उस पर दया की और कहा—“तुम आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करो और भगवान पद्मनाभ की शरण में जाओ।” बहेलिए ने मुनि के वचनों का पालन करते हुए पूर्ण भक्तिभाव से पापांकुशा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके जीवन भर के समस्त पाप भस्म हो गए और मृत्यु के उपरांत यमदूतों के स्थान पर भगवान विष्णु के पार्षद उसे दिव्य विमान में बैठाकर वैकुंठ धाम ले गए।

पापांकुशा एकादशी के दिन किए जाने वाले 4 अचूक उपाय

  • 1. स्वर्ण, तिल अथवा छाता दान: इस दिन सुपात्र ब्राह्मण को तिल, अन्न, पादुका (जूते-चप्पल) या छाते का दान करने से कभी यमराज के दंड का सामना नहीं करना पड़ता।
  • 2. पीपल वृक्ष की पूजा: पीपल की जड़ में कच्चा दूध और जल अर्पित करें तथा शाम को सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं।
  • 3. तुलसी नामाष्टक का पाठ: तुलसी माता के सम्मुख शाम को शुद्ध घी का दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
  • 4. द्वादशी पारण नियम: एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद और हरिवासर समाप्त होने पर विधिपूर्वक पारण किया जाए। पारण से पूर्व किसी सात्विक ब्राह्मण को भोजन या सीधा दान अवश्य दें।

पापांकुशा एकादशी पर श्रीहरि महापूजा एवं संकल्प सेवा

क्या आप अपने जीवन के जाने-अनजाने हुए पापों के प्रायश्चित, पितृ तृप्ति और कुंडली में स्थित अशुभ ग्रह दोषों की शांति के लिए पापांकुशा एकादशी पर विशेष अनुष्ठान करवाना चाहते हैं? विद्वान आचार्यों द्वारा अपने नाम और गोत्र से विधिपूर्वक विष्णु सहस्रनाम पाठ, तुलसी अर्चन एवं ब्राह्मण भोजन संकल्प संपन्न करवाने हेतु संपर्क करें।

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 20 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: मंगलवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: एकादशी (अर्धरात्रि 02:48 AM, 21 अक्टूबर तक, इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ)
  • विशेष: पापांकुशा एकादशी व्रत
  • नक्षत्र: धनिष्ठा (अर्धरात्रि 12:42 AM, 21 अक्टूबर तक, उपरांत शतभिषा नक्षत्र)
  • योग: गण्ड (दोपहर 12:44 PM तक, उपरांत वृद्धि योग)
  • करण: वणिज (दोपहर 03:36 PM तक), विष्टि/भद्रा (अर्धरात्रि 02:48 AM, 21 अक्टूबर तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:26 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:48 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 04:04 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 03:45 AM (21 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: तुला
  • चन्द्र राशि: मकर (दोपहर 12:12 PM तक, उपरांत कुंभ)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:28 PM तक (दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 PM से 02:43 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:48 PM से 06:13 PM तक
  • अमृत काल: दोपहर 02:30 PM से 04:02 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 02:58 PM से सायं 04:23 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 09:17 AM से 10:42 AM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:07 PM से 01:33 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 19 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: सोमवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: नवमी (प्रातः 06:07 AM तक), इसके बाद दशमी तिथि आरंभ (अर्धरात्रि 04:28 AM, 20 अक्टूबर तक)
  • नक्षत्र: श्रवण (रात्रि 11:15 PM तक, उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र)
  • योग: शूल (दोपहर 01:05 PM तक, उपरांत गण्ड योग)
  • करण: कौलव (प्रातः 06:07 AM तक), तैतिल (सायं 05:16 PM तक, उपरांत गर)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:25 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:49 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 03:22 PM
  • चन्द्रास्त: अर्धरात्रि 02:35 AM (20 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: तुला
  • चन्द्र राशि: मकर

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:28 PM तक
  • अमृत काल: दोपहर 12:45 PM से 02:18 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 07:51 AM से 09:17 AM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 10:42 AM से दोपहर 12:07 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 01:33 PM से 02:59 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 18 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: रविवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: अष्टमी (प्रातः 07:44 AM तक, इसके बाद नवमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि आठवां दिन (माँ महागौरी पूजन), महाष्टमी व्रत, संधि पूजा, कन्या पूजन
  • नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा (रात्रि 09:48 PM तक, उपरांत श्रवण नक्षत्र)
  • योग: धृति (दोपहर 01:22 PM तक, उपरांत शूल योग)
  • करण: बव (प्रातः 07:44 AM तक), बालव (सायं 07:15 PM तक, उपरांत कौलव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:25 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:50 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 02:35 PM
  • चन्द्रास्त: अर्धरात्रि 01:28 AM (19 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: तुला
  • चन्द्र राशि: मकर

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:28 PM तक (दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • संधि पूजा मुहूर्त: प्रातः 07:20 AM से प्रातः 08:08 AM तक (अष्टमी समाप्त व नवमी प्रवेश की संधि वेला)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:59 PM से 02:44 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:50 PM से 06:15 PM तक
  • अमृत काल: सायं 04:32 PM से 06:05 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): सायं 04:24 PM से 05:50 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 12:07 PM से 01:33 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 02:59 PM से सायं 04:24 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 17 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शनिवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: सप्तमी (प्रातः 09:20 AM तक, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि सातवां दिन (माँ कालरात्रि पूजन), महा सप्तमी, सरस्वती पूजा
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा (रात्रि 08:30 PM तक, उपरांत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र)
  • योग: सुकर्मा (दोपहर 01:42 PM तक, उपरांत धृति योग)
  • करण: वणिज (प्रातः 09:20 AM तक), विष्टि/भद्रा (रात्रि 08:35 PM तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:24 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:51 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 01:42 PM
  • चन्द्रास्त: अर्धरात्रि 12:24 AM (18 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: तुला (तुला संक्रांति)
  • चन्द्र राशि: धनु

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:29 PM तक (दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01:59 PM से 02:45 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:51 PM से 06:16 PM तक
  • अमृत काल: दोपहर 03:45 PM से सायं 05:18 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 09:16 AM से 10:42 AM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 01:34 PM से 02:59 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 06:24 AM से 07:50 AM तक

पंचांग: 17 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली) Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 16 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शुक्रवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: षष्ठी (पूर्वाह्न 10:54 AM तक, इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि छठा दिन (माँ कात्यायनी पूजन), बिल्व निमंत्रण, सरस्वती आवाहन
  • नक्षत्र: मूल (सायं 07:12 PM तक, उपरांत पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र)
  • योग: अतिगण्ड (दोपहर 02:08 PM तक, उपरांत सुकर्मा योग)
  • करण: तैतिल (पूर्वाह्न 10:54 AM तक), गर (रात्रि 10:32 PM तक, उपरांत वणिज)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:23 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:52 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 12:45 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 11:21 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: धनु

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 AM से दोपहर 12:29 PM तक (दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:00 PM से 02:46 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:52 PM से 06:17 PM तक
  • अमृत काल: दोपहर 01:18 PM से 02:50 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:08 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 03:00 PM से सायं 04:26 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:50 AM से 09:16 AM तक

पंचांग: 16 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली) Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 15 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: गुरुवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: पंचमी (दोपहर 12:24 PM तक, इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि पांचवां दिन (माँ स्कंदमाता पूजन), ललिता पंचमी
  • नक्षत्र: ज्येष्ठा (सायं 05:58 PM तक, उपरांत मूल नक्षत्र)
  • योग: शोभन (दोपहर 02:40 PM तक, उपरांत अतिगण्ड योग)
  • करण: बालव (दोपहर 12:24 PM तक), कौलव (अर्धरात्रि 11:56 PM तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:23 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:53 PM
  • चन्द्रोदय: पूर्वाह्न 11:46 AM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 10:24 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: वृश्चिक (सायं 05:58 PM तक, उपरांत धनु)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:01 PM से 02:46 PM तक
  • अमृत काल: प्रातः 07:58 AM से 09:30 AM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:34 PM से 03:00 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 06:23 AM से 07:49 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 09:15 AM से 10:41 AM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 14 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: बुधवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: चतुर्थी (दोपहर 01:48 PM तक, इसके बाद पंचमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि चौथा दिन (माँ कूष्माण्डा पूजन), विनायक चतुर्थी व्रत, उपांग ललिता व्रत
  • नक्षत्र: अनुराधा (सायं 04:52 PM तक, उपरांत ज्येष्ठा नक्षत्र)
  • योग: सौभाग्य (दोपहर 03:22 PM तक, उपरांत शोभन योग)
  • करण: विष्टि/भद्रा (दोपहर 01:48 PM तक), उपरांत बव (अर्धरात्रि 01:14 AM, 15 अक्टूबर तक, उपरांत बालव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:22 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:54 PM
  • चन्द्रोदय: पूर्वाह्न 10:46 AM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 09:30 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: वृश्चिक

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं (बुधवार के दिन अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं होता)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:01 PM से 02:47 PM तक
  • अमृत काल: प्रातः 08:32 AM से 10:04 AM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 12:08 PM से 01:34 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 07:48 AM से 09:15 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 10:42 AM से दोपहर 12:08 PM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

शारदीय नवरात्रि 2026: घटस्थापना शुभ मुहूर्त, माँ शैलपुत्री पूजा विधि, अखंड ज्योति नियम और प्रिय भोग

11 अक्टूबर 2026 से शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो चुका है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक चलने वाले इन पावन नौ दिनों में आदिशक्ति माँ भगवती के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना की जाती है। नवरात्रि का प्रथम दिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) कर माँ दुर्गा का आह्वान किया जाता है और प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना संपन्न होती है।

सनातन धर्म में कलश को साक्षात गणेश जी, त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और समस्त तीर्थों का साक्षात स्वरूप माना गया है:

  • सृष्टि और समृद्धि का प्रतीक: घटस्थापना के समय मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं। मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले अन्न के रूप में जौ ही उत्पन्न हुआ था। जौ के उगने की गति और रंग से आगामी वर्ष की संपन्नता का अनुमान लगाया जाता है।
  • वरुण देव और त्रिदेवी का वास: कलश के मुख में भगवान विष्णु, कंठ में भगवान शिव और मूल में ब्रह्मा जी का वास होता है, जबकि कलश के मध्य भाग में समस्त मातृकाओं व देवियों का वास माना जाता है।

घटस्थापना की प्रामाणिक एवं सरल विधि

  1. स्थान का चयन एवं वेदी निर्माण: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूजा घर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। वहां एक पाटे (चौकी) पर लाल वस्त्र बिछाएं।
  2. जौ बोना: मिट्टी के एक चौड़े पात्र में शुद्ध मिट्टी डालें और उसमें सप्तधान्य अथवा जौ बोएं। हल्का सा जल छिड़कें।
  3. कलश स्थापना: तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और मौली (कलावा) बांधें। कलश में शुद्ध जल व गंगाजल भरें। इसमें एक सुपारी, हल्दी की गांठ, सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालें।
  4. पल्लव एवं नारियल: कलश के मुख पर 5 या 7 आम अथवा अशोक के पत्ते लगाएं। इसके बाद एक जटा वाले सूखे नारियल पर लाल चुनरी या कलावा लपेटकर उसे कलश के ऊपर पूर्ण श्रद्धा से स्थापित करें।
  5. आह्वान: हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर सभी देवी-देवताओं और वरुण देव का ध्यान करें तथा प्रार्थना करें—“हे समस्त देवी-देवताओं! आप इस कलश में नौ दिनों तक वास करें और हमारे परिवार पर कृपा दृष्टि बनाए रखें।”

प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की उपासना

पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माता का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री कहलाता है। माँ शैलपुत्री वृषभ (बैल) पर सवार हैं, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है। माँ शैलपुत्री का पूजन करने से साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत करने की शक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता, आरोग्य व दृढ़ संकल्प की प्राप्ति होती है।

  • माँ शैलपुत्री का ध्यान मंत्र:वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
  • सरल बीज मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः॥
  • माँ का प्रिय भोग: माँ शैलपुत्री को गाय का शुद्ध देसी घी अथवा घी से निर्मित सफेद मिष्ठान्न (मिश्री, खीर, मावे का पेड़ा) अत्यंत प्रिय है। इससे जातक को गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • शुभ रंग: प्रथम दिन पीला (Yellow) अथवा श्वेत वस्त्र पहनकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के 3 अनिवार्य नियम

यदि आप नवरात्रि में अखंड ज्योति स्थापित कर रहे हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  1. दिशा का ध्यान: अखंड ज्योति को कलश के पास पूर्व अथवा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में रखें। यदि ज्योति घी की है तो देवी के दाईं ओर और यदि तिल के तेल की है तो बाईं ओर रखें।
  2. सदा प्रज्वलित रखें: ज्योति को कभी अकेला न छोड़ें। हवा से बचाने के लिए कांच की चिमनी या रक्षा आवरण लगाएं। बत्ती को बदलते या ठीक करते समय एक छोटा दीपक अलग से जलाकर रखें ताकि मूल ज्योति बुझने न पाए।
  3. सात्विकता और शुद्धि: जिस घर में अखंड ज्योति जलती है, वहां नौ दिनों तक घर को ताला लगाकर खाली नहीं छोड़ना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य व सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है।

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