पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 27 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: रविवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: प्रतिपदा (रात्रि 09:35 PM तक, इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ)
  • विशेष: प्रतिपदा श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: रेवती (पूर्वाह्न 11:20 AM तक, उपरांत अश्विनी नक्षत्र)
  • योग: वृद्धि (दोपहर 04:19 PM तक, उपरांत ध्रुव योग)
  • करण: कौलव (प्रातः 10:10 AM तक), तैतिल (रात्रि 09:35 PM तक, उपरांत गर)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:12 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:13 PM
  • चन्द्रोदय: सायं 07:22 PM
  • चन्द्रास्त: प्रातः 07:12 AM (28 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मीन (पूर्वाह्न 11:20 AM तक, उपरांत मेष)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:48 AM से दोपहर 12:36 PM तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:36 AM से 05:24 AM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 03:15 AM से 04:45 AM (28 सितंबर) तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:48 AM से दोपहर 12:36 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:36 PM से 01:24 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): सायं 04:43 PM से 06:13 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 12:12 PM से 01:43 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 03:13 PM से सायं 04:43 PM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

भाद्रपद पूर्णिमा 2026: सत्यनारायण पूजन विधि, चंद्र अर्घ्य का समय और माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 4 उपाय

सनातन परंपरा में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि चातुर्मास के पावन नियमों के अंतर्गत आती है और इसी दिन से पितृ पक्ष के श्राद्ध कर्मों की शुरुआत भी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है। इस पावन दिन भगवान श्री सत्यनारायण और माता महालक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करने से घर में संचित धन की वृद्धि होती है, मानसिक तनाव दूर होता है और परिवार में सुख-शांति का स्थायी वास होता है।

भाद्रपद पूर्णिमा की सरल पूजन विधि

प्रातः संकल्प एवं स्नान: सुबह पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करें और पीले या श्वेत सात्विक वस्त्र धारण कर व्रत/पूजन का संकल्प लें।

भगवान सत्यनारायण पूजन: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत, मौसमी फल, पंजीरी का प्रसाद और तुलसी दल अर्पित करें। इसके पश्चात श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण या पाठ करें।

संध्या समय चंद्र देव को अर्घ्य: शाम को चंद्रोदय के समय एक चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, जल, अक्षत और सफेद पुष्प मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सों सोमाय नमः' मंत्र का 11 बार जप करें।

पूर्णिमा श्राद्ध का महत्व: जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध और तर्पण आज के दिन करने का विधान है।

1. मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का छिड़काव: पूर्णिमा के दिन प्रातः मुख्य द्वार की सफाई कर हल्दी मिले जल का छिड़काव करें। इससे घर के भीतर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुकता है।

2. माँ लक्ष्मी को कौड़ी और खीर का भोग: सायंकाल लक्ष्मी जी के समक्ष गाय के घी का अखंड दीपक जलाएं और मखाने व दूध की खीर का भोग लगाएं। साथ ही 5 पीली कौड़ियां पूजन में रखकर अगले दिन अपनी तिजोरी में रख लें।

3. पीपल वृक्ष पर जल अर्पण: पूर्णिमा के दिन दोपहर से पूर्व पीपल के वृक्ष में जल, कच्चा दूध और बताशा अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन पीपल पर माँ लक्ष्मी का वास रहता है।

4. मानसिक शांति के लिए चंद्र दर्शन: जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित है, उन्हें आज रात्रि में कम से कम 15 से 20 मिनट चंद्रमा की रोशनी में बैठना चाहिए और चांदी के पात्र से जल पीना चाहिए।

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 26 सितंबर 2026

  • वार: शनिवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: पूर्णिमा (रात्रि 10:32 PM तक, इसके बाद आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा आरंभ)
  • विशेष पर्व: भाद्रपद पूर्णिमा, पूर्णिमा श्राद्ध (पितृ पक्ष आरंभ)
  • नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद (पूर्वाह्न 11:24 AM तक, उपरांत रेवती नक्षत्र)
  • योग: गण्ड (सायं 05:15 PM तक, उपरांत वृद्धि योग)
  • करण: बालव (प्रातः 10:48 AM तक), कौलव (रात्रि 10:32 PM तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:11 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:14 PM
  • चन्द्रोदय: सायं 06:40 PM
  • चन्द्रास्त: प्रातः 06:02 AM (27 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मीन

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:48 AM से दोपहर 12:36 PM तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:36 AM से 05:24 AM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 03:02 AM से 04:34 AM (27 सितंबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 09:12 AM से 10:43 AM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 01:43 PM से 03:13 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 06:11 AM से 07:42 AM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 25 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शुक्रवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: चतुर्दशी (रात्रि 10:52 PM तक, इसके बाद पूर्णिमा तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद (पूर्वाह्न 10:48 AM तक, उपरांत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र)
  • योग: शूल (सायं 05:35 PM तक, उपरांत गण्ड योग)
  • करण: विष्टि/भद्रा (प्रातः 10:52 AM तक), बव (रात्रि 10:52 PM तक, उपरांत बालव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:11 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:15 PM
  • चन्द्रोदय: सायं 06:00 PM
  • चन्द्रास्त: प्रातः 04:54 AM (26 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मीन (प्रातः 04:45 AM के बाद)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:49 AM से दोपहर 12:37 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 PM से 03:01 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 02:18 AM से 03:52 AM (26 सितंबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 10:43 AM से दोपहर 12:13 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 03:14 PM से सायं 04:44 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:42 AM से 09:12 AM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 24 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: गुरुवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: त्रयोदशी (रात्रि 10:48 PM तक, इसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: शतभिषा (प्रातः 09:50 AM तक, उपरांत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र)
  • योग: धृति (सायं 05:32 PM तक, उपरांत शूल योग)
  • करण: गर (प्रातः 10:35 AM तक), वणिज (रात्रि 10:48 PM तक, उपरांत विष्टि/भद्रा)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:10 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:16 PM
  • चन्द्रोदय: सायं 05:18 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 03:45 AM (25 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: कुंभ

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:49 AM से दोपहर 12:37 PM तक (गुरुवार का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:13 PM से 03:02 PM तक
  • अमृत काल: रात्रि 01:10 AM से 02:48 AM (25 सितंबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:44 PM से 03:14 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 06:10 AM से 07:41 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 09:12 AM से 10:43 AM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

पितृ पक्ष (श्राद्ध): पितृ दोष के मुख्य लक्षण और घर पर तर्पण व श्राद्ध की सरल वैदिक विधि

सनातन धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का समय पूर्वजों और पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण अर्पित करने का सबसे पवित्र काल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, हमारे पूर्वज सूक्ष्म शरीर से इस अवधि में पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा दिए गए जल, अन्न और स्मरण को स्वीकार कर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यदि परिवार में पितृ दोष हो, तो पितृ पक्ष में किए गए सात्विक उपाय जीवन की तमाम रुकावटों को दूर कर वंश वृद्धि और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

कुंडली और जीवन में पितृ दोष के प्रमुख लक्षण

संतान सुख में बाधा: योग्य संतान के विवाह में अप्रत्याशित विलंब होना या वंश वृद्धि में निरंतर रुकावटें आना।

पारिवारिक कलह और अशांति: परिवार में बिना किसी ठोस कारण के हर समय तनाव, अशांति या मनमुटाव बना रहना।

आर्थिक उन्नति का रुकना: दिन-रात परिश्रम करने के बावजूद बरकत न होना, जमा-पूंजी अचानक व्यर्थ कार्यों या बीमारियों में खर्च हो जाना।

अचानक दुर्घटनाएं या भय: मन में अकारण भय रहना या बार-बार पूर्वजों से जुड़े स्वप्न आना।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण की सरल विधि

1. नित्य जल तर्पण (अंगूठे के रास्ते जल अर्पण): प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक स्वच्छ पात्र में जल, कच्चा दूध, काले तिल और कुश रखें। दोनों हाथों की अंजलि से पितृतीर्थ (अंगूठे के भाग) से 3 बार पितरों के नाम से जल समर्पित करें।

2. पंचबली भोग: श्राद्ध की तिथि पर भोजन बनाकर सबसे पहले 5 हिस्सों में भोग निकाला जाता है—गाय (गोबली), कुत्ता (श्वानबली), कौवा (काकबली), देवगण (देवादिबली) और चींटियां (पिपीलिकादिबली)। इसके बाद ही घर के अन्य सदस्यों को भोजन करना चाहिए।

3. योग्य ब्राह्मण को भोजन एवं दान: पूर्वज की तिथि के दिन किसी सात्विक वैदिक ब्राह्मण को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं अथवा मंदिर में सीधा (कच्चा अन्न, घी, दाल, आटा, वस्त्र और दक्षिणा) अर्पित करें।

4. पीपल वृक्ष की सेवा: पितृ पक्ष के दौरान दोपहर के समय पीपल के वृक्ष की जड़ में जल और कच्चा दूध अर्पित करना तथा सायंकाल सरसों के तेल का दीपक जलाना पितरों को परम तृप्ति प्रदान करता है।

पितृ पक्ष के दौरान क्या न करें?

इस अवधि में नए घर का गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन जैसे शुभ व मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।

घर में पूर्ण सात्विकता का पालन करें—लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग रखें।

किसी भी बुजुर्ग, असहाय या द्वार पर आए भिक्षुक व पशु-पक्षी का अनादर न करें।

पितृ पक्ष में अपने पितरों की शांति एवं तर्पण हेतु विशेष संकल्प करवाएँ

क्या आपकी कुंडली में पितृ दोष है अथवा आप पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के निमित्त योग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा तर्पण, गीता पाठ, पिंडदान अथवा ब्राह्मण भोज का सात्विक संकल्प करवाना चाहते हैं? अपने नाम और गोत्र से पूजा संकल्प हेतु हमारे आचार्यों से संपर्क करें।

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पंचांग एवं मुहूर्त

आज का पंचांग: 23 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: बुधवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: द्वादशी (रात्रि 10:24 PM तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: श्रवण (प्रातः 08:35 AM तक, उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र)
  • योग: सुकर्मा (सायं 05:08 PM तक, उपरांत धृति योग)
  • करण: कौलव (प्रातः 10:05 AM तक), तैतिल (रात्रि 10:24 PM तक, उपरांत गर)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:10 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:17 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 04:34 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 02:35 AM (24 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मकर (रात्रि 09:15 PM तक, उपरांत कुंभ)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं (बुधवार को अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं होता)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:14 PM से 03:03 PM तक
  • अमृत काल: रात्रि 11:20 PM से 01:02 AM (24 सितंबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 12:13 PM से 01:44 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 07:41 AM से 09:12 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 10:43 AM से दोपहर 12:13 PM तक

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आज का पंचांग: 23 सितंबर 2026 (नई दिल्ली) Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

आज का पंचांग: 22 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: मंगलवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: परिवर्तिनी एकादशी (रात्रि 09:43 PM तक, इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा (प्रातः 07:06 AM तक, उपरांत श्रवण नक्षत्र)
  • योग: अतिगण्ड (सायं 04:29 PM तक, उपरांत सुकर्मा योग)
  • करण: वणिज (प्रातः 08:55 AM तक), विष्टि/भद्रा (रात्रि 09:43 PM तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:09 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:18 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 03:48 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 01:43 AM (23 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मकर

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:49 AM से दोपहर 12:38 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:15 PM से 03:04 PM तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:35 AM से 05:22 AM तक
  • अमृत काल: रात्रि 09:52 PM से 11:36 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 03:16 PM से सायं 04:47 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 09:11 AM से 10:43 AM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:14 PM से 01:45 PM तक

व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क करें

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💬 पंडित जी से शुभ मुहूर्त जानें

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ज्योतिष एवं समाधान

मासिक राशिफल अक्टूबर 2026: जानें मेष से मीन सभी 12 राशियों का करियर, धन, स्वास्थ्य और उपाय

अक्टूबर 2026 का महीना ग्रह-गोचर और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस माह शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आ रहा है, साथ ही शुक्र, सूर्य और देवगुरु बृहस्पति की चाल में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। ग्रहों की यह स्थिति व्यापार, नौकरी, दांपत्य जीवन और आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालेगी। आइए जानते हैं वैदिक ज्योतिष गणना के अनुसार सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा अक्टूबर का महीना।

मेष से कर्क राशि का मासिक भविष्यफल

करियर में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग बन रहे हैं। महीने के मध्य में आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, हालांकि क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना आवश्यक होगा।

  • उपाय: मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें।

व्यापार और साझेदारी के कार्यों में सावधानी बरतें। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति रहेगी, लेकिन जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा सतर्क रहें। अनावश्यक खर्चों से बचें।

  • उपाय: शुक्रवार को छोटी कन्याओं को मिश्री या सफेद मिठाई खिलाएं।

विद्यार्थियों और नौकरीपेशा जातकों के लिए समय अनुकूल है। लंबे समय से रुका हुआ काम गति पकड़ेगा। पुराने मित्रों या संपर्कों से लाभ मिलेगा।

  • उपाय: प्रतिदिन तुलसी जी को जल अर्पित करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।

आर्थिक मामलों में धन संचय और लाभ की स्थिति बनेगी। संपत्ति या वाहन खरीदने की योजना आगे बढ़ सकती है। माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

  • उपाय: सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध व जल अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र जपें।

सिंह से वृश्चिक राशि का मासिक भविष्यफल

आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। सरकारी क्षेत्र अथवा उच्चाधिकारियों से सहयोग मिलेगा। माह के अंत में मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि के प्रबल योग हैं।

  • उपाय: नित्य प्रातः तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें एवं गायत्री मंत्र का जप करें।

कार्यक्षेत्र में मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है, लेकिन परिणाम सकारात्मक रहेंगे। लेन-देन में लिखा-पढ़ी स्पष्ट रखें। सेहत के मामले में पेट से संबंधित सावधानी रखें।

  • उपाय: बुधवार को साबुत मूंग की दाल का दान करें और श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

आर्थिक दृष्टि से यह माह मिश्रित फलदायी रहेगा। किसी नए प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह अवश्य लें। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी।

  • उपाय: शुक्रवार को माँ लक्ष्मी को लाल पुष्प अर्पित करें और श्री कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

करियर में नई दिशा और अवसर प्राप्त होंगे। यदि कोई कानूनी या पुराना विवाद चल रहा था, तो उसमें राहत मिल सकती है। अचानक यात्रा के योग बन सकते हैं।

  • उपाय: नित्य हनुमान चालीसा का 3 बार पाठ करें और मसूर दाल का दान करें।

धनु से मीन राशि का मासिक भविष्यफल

उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा अथवा व्यापार विस्तार की योजनाएं सफल होंगी। भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। धार्मिक आयोजनों में मन लगेगा।

  • उपाय: गुरुवार को माथे पर केसर का तिलक लगाएं और भगवान विष्णु की पूजा करें।

कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसानदेह हो सकता है। माह के उत्तरार्ध में आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे।

  • उपाय: शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।

व्यापार और साझेदारी के काम में गति आएगी। नए लोगों से संपर्क लाभकारी सिद्ध होंगे। जीवनसाथी के साथ तालमेल अच्छा रहेगा।

  • उपाय: शनिवार के दिन असहाय या दिव्यांगजनों को काले छाते या भोजन की सेवा दें।

नौकरी में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। लेन-देन और कर्ज के मामलों में सतर्कता बरतें। आध्यात्मिक यात्रा के योग हैं।

  • उपाय: गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करें और पीली वस्तुओं का दान करें।

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यह राशिफल सामान्य गोचर गणना पर आधारित है। आपकी जन्म कुंडली में दशा, अंतर्दशा और ग्रहों के सटीक प्रभाव के अनुसार नौकरी, व्यापार, विवाह अथवा स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी हेतु हमारे विद्वान आचार्यों से सीधे संपर्क करें।

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ज्योतिष एवं समाधान

कालसर्प दोष: क्या सच में होता है अनिष्टकारी? जानें असली लक्षण और सरल वैदिक समाधान

वैदिक ज्योतिष में कालसर्प योग (या दोष) को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और भय व्याप्त हैं। कई लोग इसे जीवन भर के दुर्भाग्य का कारण मान लेते हैं, जबकि शास्त्रों और व्यावहारिक ज्योतिष के अनुसार यह पूर्णतः सत्य नहीं है। इतिहास में ऐसे अनेक सफल और प्रभावशाली व्यक्ति हुए हैं जिनकी कुंडली में कालसर्प योग था और उन्होंने शिखर को छुआ। यदि यह योग जातक को संघर्ष देता है, तो सही समय पर उचित वैदिक उपचार से यह अप्रत्याशित सफलता का माध्यम भी बनता है।

कुंडली में कैसे बनता है कालसर्प योग?

जब जन्म कुंडली में सभी सात प्रमुख ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) छाया ग्रह राहु और केतु के एक ही तरफ आ जाते हैं और दूसरी तरफ का हिस्सा खाली रह जाता है, तब इसे ‘कालसर्प योग’ कहा जाता है।

  • यदि सभी ग्रह राहु-केतु के पूर्ण दायरे में हों, तो इसे पूर्ण कालसर्प योग कहते हैं।
  • यदि कोई एक ग्रह राहु-केतु के घेरे से बाहर निकल जाए, तो इसे आंशिक कालसर्प दोष माना जाता है, जिसका प्रभाव काफी हल्का होता है।

कालसर्प दोष के मुख्य प्रभाव और लक्षण

मानसिक तनाव एवं अनिद्रा: रात में अचानक नींद खुलना, पानी या सर्प से जुड़े डरावने सपने आना।

परिश्रम का उचित फल न मिलना: 99% तक काम बन जाने के बाद अंतिम समय पर रुक जाना।

करियर में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव: व्यवसाय या नौकरी में अचानक बड़ा बदलाव या आर्थिक स्थिरता की कमी।

संतान या वैवाहिक विलंब: पारिवारिक जीवन में सामंजस्य की कमी या संतान प्राप्ति में अनपेक्षित देरी।

कालसर्प दोष शमन के 4 अचूक वैदिक उपाय

1. नित्य भगवान शिव का जलाभिषेक: भगवान शिव नागों के अधिपति हैं। तांबे या पीतल के लोटे से शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा महामृत्युंजय मंत्र का नित्य जप इस दोष का सबसे बड़ा कवच है।

2. नाग पंचमी या सोमवार को चांदी के नाग-नागिन का पूजन: बहते स्वच्छ जल में चांदी के छोटे नाग-नागिन के जोड़े का विसर्जन अथवा किसी प्राचीन शिव मंदिर में इनका अर्पण करने से राहु-केतु जनित पीड़ा शांत होती है।

3. पक्षियों और मछलियों की सेवा: प्रतिदिन सुबह पक्षियों को बाजरा खिलाना और मछलियों को आटे की गोलियां डालना राहु के नकारात्मक प्रभाव को शुभता में बदलता है।

4. विशेष महामृत्युंजय या कालसर्प शांति विधान: यदि जीवन में निरंतर बड़ी अड़चनें आ रही हों, तो योग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा त्र्यंबकेश्वर, उज्जैन या किसी सिद्ध ज्योतिर्लिंग तीर्थ की विधि अनुसार राहु-केतु और सर्प शांति संकल्प करवाना अत्यंत कल्याणकारी होता है।

अपनी जन्म कुंडली में कालसर्प योग की सत्यता और सही उपाय जानें

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