धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

परिवर्तिनी एकादशी (जलझूलनी एकादशी): महत्व, व्रत नियम और भगवान विष्णु की पूजन विधि

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘परिवर्तिनी एकादशी’, ‘पद्मा एकादशी’ या ‘जलझूलनी एकादशी’ कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान क्षीरसागर में योगनिद्रा में शयन कर रहे भगवान श्रीहरि विष्णु इस पावन तिथि पर करवट बदलते हैं। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और माता लक्ष्मी के पूजन से जीवन के समस्त पापों और आर्थिक संकटों का शमन होता है।

परिवर्तिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं बताया था कि जो भक्त परिवर्तिनी एकादशी का व्रत और पूजन करता है, उसे वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। यह एकादशी अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाने और घर में सुख-शांति व समृद्धि की वृद्धि करने वाली मानी गई है।

एकादशी पूजन की सरल विधि

प्रातः संकल्प एवं स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर तीर्थ जल या गंगाजल मिले जल से स्नान करें और पीले वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु का अभिषेक: श्रीहरि के विग्रह या शालिग्राम जी को पंचामृत व शुद्ध जल से स्नान कराएं।

पीले पुष्प एवं तुलसी दल: भगवान को पीले चंदन का तिलक लगाएं, पीले फूल, फल और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें (बिना तुलसी दल के श्रीहरि भोग स्वीकार नहीं करते)।

वामन अवतार कथा व मंत्र जप: इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ अथवा ‘ॐ विष्णवे नमः’ मंत्र की कम से कम 3 माला जपें तथा वामन अवतार की पावन कथा का श्रवण करें।

संध्या समय दीपदान: शाम के समय तुलसी जी के पास और घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें।

एकादशी के दिन क्या न करें?

इस दिन घर में चावल (अन्न) का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है।

एकादशी के पावन दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते (एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।

क्रोध, वाद-विवाद, असत्य भाषण और तामसिक भोजन से पूर्ण परहेज रखें।

अपने नाम एवं गोत्र से विशेष विष्णु-लक्ष्मी महापूजा करवाएँ

क्या आप अपने परिवार के आरोग्य, सुख-समृद्धि और ग्रह शांति हेतु योग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संपूर्ण विधि-विधान से विष्णु सहस्त्रनाम पाठ या विशेष एकादशी संकल्प करवाना चाहते हैं? घर बैठे संकल्प एवं पूजा संपन्न कराने के लिए हमसे संपर्क करें।

परिवर्तिनी एकादशी (जलझूलनी एकादशी): महत्व, व्रत नियम और भगवान विष्णु की पूजन विधि Read Post »

Uncategorized, पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग (21 सितंबर 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

  • वार: सोमवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: दशमी (रात्रि 09:00 PM तक, इसके बाद एकादशी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा (संपूर्ण दिन और रात)
  • योग: शोभन (दोपहर 03:52 PM तक, उपरांत अतिगण्ड योग)
  • करण: गर (प्रातः 07:25 AM तक, फिर वणिज रात्रि 09:00 PM तक, उपरांत विष्टि/भद्रा)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:09 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:19 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 03:00 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 01:25 AM (22 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मकर (प्रातः 11:30 AM के बाद)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:50 AM से दोपहर 12:38 PM तक (सोमवार का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:33 AM से 05:21 AM तक
  • अमृत काल: रात्रि 10:15 PM से 11:58 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 07:40 AM से 09:11 AM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 10:42 AM से दोपहर 12:14 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 01:45 PM से 03:16 PM तक

व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क करें

गृह प्रवेश, नामकरण, व्यापार आरंभ या नए वाहन की खरीद के लिए अपनी जन्म कुंडली और तिथि के अनुसार सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए हमारे विद्वान आचार्यों से मार्गदर्शन लें।

पंचांग (21 सितंबर 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

आज का पंचांग: 20 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: रविवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद (अमान्त एवं पूर्णिमान्त)
  • तिथि: नवमी (सायं 05:51 PM तक, इसके बाद दशमी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा (रात 04:33 AM तक, 21 सितंबर)
  • योग: सौभाग्य (दोपहर 03:21 PM तक, उपरांत शोभन योग)
  • करण: कौलव (सायं 05:51 PM तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:08 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:20 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 02:21 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 12:55 AM (21 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: धनु

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:50 AM से दोपहर 12:39 PM तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:32 AM से 05:20 AM तक
  • अमृत काल: रात्रि 11:11 PM से 12:58 AM (21 सितंबर)
  • राहुकाल (अशुभ समय): सायं 04:48 PM से 06:20 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 12:14 PM से 01:45 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 03:17 PM से सायं 04:48 PM तक

व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क करें

गृह प्रवेश, नामकरण, व्यापार आरंभ या नए वाहन की खरीद के लिए अपनी जन्म कुंडली और तिथि के अनुसार सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए हमारे विद्वान आचार्यों से मार्गदर्शन लें।

आज का पंचांग: 20 सितंबर 2026 (नई दिल्ली) Read Post »

ज्योतिष एवं समाधान

नौकरी और व्यापार में बार-बार आ रही हैं रुकावटें? जानें कुंडली के कमजोर ग्रह और 5 अचूक उपाय

कड़ी मेहनत और योग्यता के बावजूद यदि कार्यक्षेत्र में पदोन्नति न मिल रही हो, व्यापार में जमा-पूंजी अटक जाती हो या नौकरी बार-बार छूट रही हो, तो वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव का संकेत हो सकता है। आजीविका, मान-सम्मान और व्यापारिक बुद्धि के लिए मुख्य रूप से सूर्य देव, देवगुरु बृहस्पति और बुध ग्रह की स्थिति जिम्मेदार होती है।

कार्यक्षेत्र में बाधा देने वाले मुख्य ग्रहीय कारण

सूर्य का कमजोर होना: सूर्य देव मान-सम्मान, सरकारी नौकरी, उच्च पद और आत्मविश्वास के कारक हैं। सूर्य के पीड़ित होने पर उच्चाधिकारियों से मतभेद और मेहनत का श्रेय न मिलने जैसी समस्याएं आती हैं।

बुध का अस्त या नीच होना: बुध ग्रह व्यापार, संचार, निर्णय क्षमता और वित्तीय सूझबूझ के स्वामी हैं। बुध कमजोर होने पर व्यापार में घाटा और गलत फैसलों से धन हानि होती है।

दशम भाव (कर्म भाव) पर पाप प्रभाव: जन्म कुंडली का दसवां घर आजीविका का होता है। जब इस भाव पर राहु, केतु या शनि की प्रतिकूल दृष्टि पड़ती है, तो करियर में निरंतर अस्थिरता बनी रहती है।

करियर व कारोबार में सफलता के 5 सरल वैदिक उपाय

1. नित्य सूर्य अर्घ्य एवं गायत्री जप: प्रतिदिन प्रातः सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और रोली मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके साथ कम से कम 11 बार गायत्री मंत्र का जप करें।

2. बुधवार को हरी वस्तुओं का दान: व्यापार वृद्धि और वाणी में प्रभावशीलता के लिए बुधवार के दिन गाय को हरी घास या पालक खिलाएं, अथवा साबुत हरी मूंग की दाल का दान करें।

3. कार्यस्थल पर ईशान कोण को शुद्ध रखें: अपनी दुकान या कार्यालय के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण को हमेशा स्वच्छ और हल्का रखें। वहाँ नित्य एक छोटा दीपक या कपूर जलाना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।

4. गुरु ग्रह की अनुकूलता: प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु का ध्यान करें, माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं और चने की दाल या केले का दान करें।

5. श्री कनकधारा स्तोत्र का पाठ: यदि व्यापार में धन फंसा हुआ है, तो संध्या समय घी का दीपक जलाकर श्री कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ विशेष रूप से फलदायी होता है।

अपनी कुंडली के अनुसार करियर और व्यापार का सही मार्गदर्शन लें

क्या आपके करियर में तरक्की रुक गई है या नया व्यवसाय शुरू करने में संशय है? अपनी जन्म पत्रिका का संपूर्ण विश्लेषण करवाकर उपयुक्त रत्न, ग्रह शांति अथवा अनुकूल दिशा जानने के लिए हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

नौकरी और व्यापार में बार-बार आ रही हैं रुकावटें? जानें कुंडली के कमजोर ग्रह और 5 अचूक उपाय Read Post »

धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

घर के मुख्य द्वार पर जरूर रखें ये 4 मांगलिक वस्तुएं: वास्तु दोष दूर कर लाती हैं सुख-समृद्धि

वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा में घर के मुख्य द्वार को केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और माँ लक्ष्मी के आगमन का प्रमुख केंद्र माना गया है। यदि मुख्य द्वार पर कुछ खास मांगलिक और वैदिक प्रतीकों को सही विधि से स्थापित किया जाए, तो नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती और परिवार में सुख-शांति व बरकत बनी रहती है।

मुख्य द्वार के 4 अत्यंत शुभ मांगलिक प्रतीक

1. स्वास्तिक का पावन चिह्न: स्वास्तिक को भगवान गणेश और ऋद्धि-सिद्धि का साक्षात स्वरूप माना जाता है। मुख्य द्वार के दोनों ओर रोली या सिंदूर से 9 अंगुल लंबा और 9 अंगुल चौड़ा स्वास्तिक बनाने से वास्तु दोष समाप्त होते हैं और घर पर किसी की बुरी दृष्टि नहीं पड़ती।

2. आम या अशोक के पत्तों का तोरण: किसी भी शुभ कार्य या नित्य रूप से मुख्य द्वार पर आम या अशोक के ताजे पत्तों का बंधनवार (तोरण) बाँधना अत्यंत शुभ होता है। यह घर के भीतर आने वाली वायु को शुद्ध करता है और नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है।

3. तांबे के लोटे या उरली में जल और ताजे पुष्प: मुख्य द्वार के पास एक स्वच्छ पात्र (तांबे का लोटा या पीतल की उरली) में स्वच्छ जल भरकर उसमें ताजे पीले या लाल फूल रखें। इससे घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

4. माँ लक्ष्मी के चरण चिह्न (भीतर की ओर): मुख्य द्वार की चौखट पर माँ लक्ष्मी के चरण चिह्न ऐसे लगाएं कि उनकी दिशा घर के अंदर की तरफ आती हुई प्रतीत हो। यह धन के स्थायी वास और समृद्धि का प्रतीक है।

मुख्य द्वार पर क्या न रखें?

जूते-चप्पल का ढेर या टूटी-फूटी वस्तुएं कभी मुख्य दरवाजे के सामने न रखें।

मुख्य द्वार के ठीक सामने कूड़ेदान या झाड़ू खुला न छोड़ें।

मुख्य दरवाजे को खोलते या बंद करते समय कर्कश आवाज़ (चर्र-चर्र) नहीं आनी चाहिए, यदि आती हो तो तुरंत तेल डालें।

घर में सुख-समृद्धि हेतु वास्तु एवं शांति पूजन करवाएँ

क्या आपके घर में निरंतर कलह, आर्थिक तंगी या भारीपन महसूस होता है? अपने घर के वास्तु दोष निवारण अथवा गृह शांति पूजन हेतु योग्य वैदिक ब्राह्मणों से संकल्प एवं पूजा बुक करने के लिए हमसे संपर्क करें।

घर के मुख्य द्वार पर जरूर रखें ये 4 मांगलिक वस्तुएं: वास्तु दोष दूर कर लाती हैं सुख-समृद्धि Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

आज का पंचांग (19 सितंबर 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

  • वार: शनिवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: अष्टमी (अपराह्न 03:55 PM तक, इसके बाद नवमी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा (संपूर्ण दिन व रात)
  • योग: शोभन (दोपहर 12:40 PM तक, उपरांत अतिगण्ड)
  • करण: बव (प्रातः 06:05 AM तक, फिर बालव दोपहर 03:55 PM तक, उपरांत कौलव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:08 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:21 PM
  • चन्द्रोदय: दोपहर 01:40 PM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 12:20 AM (20 सितंबर)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:50 AM से दोपहर 12:39 PM तक
  • अमृत काल: रात्रि 08:30 PM से 10:05 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 09:11 AM से 10:43 AM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 01:46 PM से 03:17 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 06:08 AM से 07:40 AM तक

व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क करें

गृह प्रवेश, नामकरण, व्यापार आरंभ या नए वाहन की खरीद के लिए अपनी जन्म कुंडली और तिथि के अनुसार सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए हमारे विद्वान आचार्यों से मार्गदर्शन लें।

आज का पंचांग (19 सितंबर 2026): तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया Read Post »

ज्योतिष एवं समाधान

मांगलिक दोष: लक्षण, प्रभाव और निवारण के सरल वैदिक उपाय

वैदिक ज्योतिष में विवाह और वैवाहिक संबंधों के संदर्भ में मांगलिक दोष की चर्चा सर्वाधिक होती है। अक्सर लोग इसे लेकर अनजाने भय और भ्रम में रहते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हर कुंडली में मांगलिक दोष अनिष्टकारी नहीं होता। यदि जन्म पत्रिका में मंगल ग्रह की स्थिति अनुकूल न हो, तो शास्त्रों में इसके शमन और शांति के स्पष्ट सात्विक नियम बताए गए हैं।

कुंडली में कब बनता है मांगलिक दोष?

शास्त्रों के अनुसार, लग्न कुंडली के प्रथम (1st), चतुर्थ (4th), सप्तम (7th), अष्टम (8th) अथवा द्वादश (12th) भाव में जब मंगल ग्रह विराजमान होता है, तब जातक को मांगलिक कहा जाता है:

  • लग्न (प्रथम भाव) में मंगल: स्वभाव में उग्रता, जल्दबाजी और क्रोध बढ़ा सकता है।
  • चतुर्थ भाव में मंगल: पारिवारिक शांति और गृहस्थ जीवन के सुख पर प्रभाव डालता है।
  • सप्तम भाव में मंगल: दांपत्य सुख, जीवनसाथी के साथ सामंजस्य और साझेदारी को प्रभावित करता है।
  • अष्टम भाव में मंगल: जीवन में आकस्मिक कष्ट और कलह की आशंका बढ़ाता है।
  • द्वादश भाव में मंगल: अनिद्रा, अत्यधिक मानसिक तनाव और व्यर्थ के खर्चों का कारण बनता है।

मांगलिक दोष शांति के 4 अचूक उपाय

1. नित्य हनुमान जी की उपासना: प्रत्येक मंगलवार को सिंदूर और चमेली का तेल हनुमान जी को अर्पित करें एवं कम से कम 3 बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें।

2. रक्तदान (सर्वश्रेष्ठ सात्विक उपाय): यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो वर्ष में एक या दो बार स्वेच्छा से रक्तदान करना मंगल ग्रह की शांति का सर्वोत्तम उपाय माना गया है।

3. लाल मसूर व गुड़ का दान: मंगलवार के दिन किसी जरूरतमंद या सेवादार को सवा किलो लाल मसूर की दाल, गुड़ या तांबे का बर्तन दान करें।

4. विशेष जप एवं मंगल शांति विधान: गंभीर दोष की स्थिति में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा ‘ॐ भौं भौमाय नमः’ मंत्र के 10,000 वैदिक जप अथवा उज्जैन अंगारेश्वर तीर्थ विधि से भात पूजा करवाना अत्यंत फलदायी होता है।

अपनी कुंडली में मंगल का प्रभाव और सही समाधान जानें

क्या आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के विवाह में अड़चनें आ रही हैं? जन्म पत्रिका का संपूर्ण विश्लेषण कराने और सटीक रत्न अथवा पूजा परामर्श हेतु हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

मांगलिक दोष: लक्षण, प्रभाव और निवारण के सरल वैदिक उपाय Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

आज का पंचांग: 18 सितंबर 2026 (नई दिल्ली) तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया

  • वार: शुक्रवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: भाद्रपद
  • तिथि: सप्तमी (प्रातः 08:18 AM तक, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ)
  • नक्षत्र: ज्येष्ठा (सायं 05:40 PM तक, इसके बाद मूल नक्षत्र)
  • योग: आयुष्मान (दोपहर 01:25 PM तक, उपरांत सौभाग्य)
  • करण: वणिज (प्रातः 08:18 AM तक, उपरांत विष्टि/भद्रा)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:07 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:23 PM
  • चन्द्रोदय: पूर्वाह्न 11:43 AM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 10:29 PM

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:50 AM से दोपहर 12:39 PM तक
  • अमृत काल: प्रातः 08:55 AM से 10:25 AM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 10:43 AM से दोपहर 12:15 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 03:19 PM से सायं 04:51 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:39 AM से 09:11 AM तक

व्यक्तिगत शुभ मुहूर्त अथवा कुंडली विश्लेषण हेतु संपर्क करें

गृह प्रवेश, नामकरण, व्यापार आरंभ या नए वाहन की खरीद के लिए अपनी जन्म कुंडली और तिथि के अनुसार सटीक शुभ मुहूर्त जानने के लिए हमारे विद्वान आचार्यों से मार्गदर्शन लें।

आज का पंचांग: 18 सितंबर 2026 (नई दिल्ली) तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया Read Post »

धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

घर में पूजा करते समय कभी न करें ये 5 गलतियाँ: जानें शास्त्रों के अनुसार सही नियम

शास्त्रों में कहा गया है कि निष्काम भाव और सही विधि से किया गया छोटा सा पूजन भी अनंत फल प्रदान करता है। कई बार जानकारी के अभाव में अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनसे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता। आइए जानते हैं नित्य पूजा-पाठ से जुड़े वे नियम जिनका ध्यान हर गृहस्थ को रखना चाहिए।

पूजा-पाठ के 5 जरूरी वैदिक नियम

1. दीपक से दीपक कभी न जलाएँ: अग्नि पुराण और निर्णय सिंधु के अनुसार एक दीपक से दूसरा दीपक जलाना वर्जित माना गया है। ऐसा करने से रोग और कलह की आशंका रहती है।

2. खंडित चावल (अक्षत) का निषेध: भगवान को हमेशा साबुत, बिना टूटे हुए चावल ही अर्पित करने चाहिए। टूटे हुए चावल अर्पण करने से पूजा अधूरी मानी जाती है।

3. शंख का जल सूर्य देव और शिव जी को न दें: शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव को तांबे के लोटे से और शिव जी को तांबे या पीतल के पात्र से जल अर्पित किया जाता है, शंख से इन दोनों पर जल चढ़ाना वर्जित है।

4. तुलसी दल तोड़ने का समय: द्वादशी, संक्रांति, रविवार और संध्याकाल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। साथ ही बिना स्नान किए तुलसी स्पर्श न करें।

5. आरती के बाद आचमन और समर्पण: आरती पूर्ण होने के बाद दाहिने हाथ से जल घुमाकर धरती पर छोड़ें और “त्वमेव माता च पिता त्वमेव” भाव से प्रभु को नमन करें।

घर अथवा परिवार के निमित्त संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करवाएँ

यदि आप अपने घर, व्यापार अथवा परिवार के कल्याण हेतु योग्य वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संपूर्ण विधि-विधान से रुद्राभिषेक, नवग्रह शांति अथवा कोई विशेष जप-अनुष्ठान करवाना चाहते हैं, तो हमसे सीधे संपर्क करें।

घर में पूजा करते समय कभी न करें ये 5 गलतियाँ: जानें शास्त्रों के अनुसार सही नियम Read Post »

ज्योतिष एवं समाधान

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के 5 अचूक वैदिक उपाय: जानें क्या करें और क्या न करें

वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव आता है, तो जीवन में मानसिक तनाव, कार्यक्षेत्र में रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सही नियमों और सात्विक उपायों के पालन से शनि देव के अनिष्ट प्रभावों को शांत किया जा सकता है।

शनि देव को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय

1. नित्य दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ: शनिवार की संध्या समय पीपल के वृक्ष के पास या घर के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाकर दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से विशेष मानसिक शांति प्राप्त होती है।

2. छाया दान की विधि: शनिवार के दिन एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को किसी जरूरतमंद को या शनि मंदिर में दान कर दें।

3. हनुमान जी की नित्य आराधना: शास्त्रों में उल्लेख है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कभी कष्ट नहीं देते। मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ करें।

4. असहाय एवं जरूरतमंदों की सेवा: शनि देव सेवा भाव से सबसे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। दिव्यांगों, सफाईकर्मियों और वृद्धजनों को काले वस्त्र, जूते या भोजन भेंट करें।

5. महामृत्युंजय मंत्र का जप: साढ़ेसाती के दौरान यदि स्वास्थ्य को लेकर कष्ट हो, तो रुद्राक्ष की माला से प्रतिदिन कम से कम 1 माला महामृत्युंजय मंत्र का जप अवश्य करें।

साढ़ेसाती के दौरान क्या न करें?

मदिरा, तामसिक भोजन और जुए जैसी प्रवृत्तियों से पूर्णतः दूर रहें।

किसी के साथ छल-कपट या अपने अधीनस्थों (कर्मचारियों/मजदूरों) का हक न मारें।

शनिवार के दिन लोहा, सरसों का तेल या काले तिल खरीदकर घर न लाएँ (दान करना शुभ है, खरीदना वर्जित)।

क्या आपकी कुंडली में भी शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है? अपनी जन्म पत्रिका के अनुसार सटीक रत्न, रुद्राक्ष अथवा शांति विधान जानने हेतु हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से संपर्क करें।

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के 5 अचूक वैदिक उपाय: जानें क्या करें और क्या न करें Read Post »

Scroll to Top