पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 04 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: रविवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: अष्टमी (प्रातः 08:08 AM तक, इसके बाद नवमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: अष्टमी श्राद्ध (प्रातः), नवमी श्राद्ध / मातृ नवमी (अविधवा नवमी)
  • नक्षत्र: पुनर्वसु (प्रातः 07:05 AM तक, उपरांत पुष्य नक्षत्र)
  • योग: शिव (प्रातः 06:47 AM तक, उपरांत सिद्ध योग)
  • करण: कौलव (प्रातः 08:08 AM तक), तैतिल (सायं 06:55 PM तक, उपरांत गर)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:16 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:04 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 12:47 AM (05 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: दोपहर 02:26 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: कर्क

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • पुष्य योग: प्रातः 07:05 AM से पूरे दिन (सर्वकार्य सिद्धि हेतु अत्यंत शुभ)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 PM से 02:54 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:33 PM से 01:20 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:20 PM से 03:26 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): सायं 04:36 PM से 06:04 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 12:10 PM से 01:39 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 03:07 PM से सायं 04:36 PM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

पितृ पक्ष में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां: शास्त्रों के अनुसार वर्जित हैं ये कार्य, जानें पितृ दोष से बचने के कड़े नियम

पितृ पक्ष में क्या न करें? 7 प्रमुख वर्जित कार्य

  • 1. मांगलिक और नए शुभ कार्यों का आरंभ न करें:पितृ पक्ष के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार अथवा नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हैं। यह समय केवल पितरों के स्मरण और आत्मशांति के लिए आरक्षित है।
  • 2. तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और मदिरा का त्याग:श्राद्ध पक्ष में घर में पूर्ण सात्विकता रहनी चाहिए। मांस, मछली, मदिरा के साथ-साथ लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, हींग, चना और बासी भोजन का प्रयोग भोजन में बिल्कुल न करें।
  • 3. बाल, दाढ़ी कटवाने और नाखून काटने से बचें:जो व्यक्ति अपने पितरों का मुख्य श्राद्ध या तर्पण कर रहा हो, उसे इस अवधि में दाढ़ी-मूंछ, बाल कटवाने या नाखून काटने से बचना चाहिए। इसे शोक और संयम का प्रतीक माना गया है।
  • 4. द्वार पर आए भिक्षुक, पशु या पक्षी का अनादर न करें:मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज किसी भी रूप (कुत्ता, गाय, कौवा अथवा निर्धन याचक) में आपके द्वार पर आ सकते हैं। किसी भी जीव को दुत्कारें नहीं; उन्हें अन्न, जल या भोजन अवश्य दें।
  • 5. लोहे या स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें:पितरों के तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध के भोजन में लोहे और स्टील के बर्तनों का उपयोग वर्जित माना गया है। शास्त्रों में इसके लिए तांबा, पीतल, चांदी अथवा पत्तल (पलाश/केले के पत्ते) को ही शुद्ध माना गया है।
  • 6. संध्याकाल या रात्रि में श्राद्ध न करें:श्राद्ध कर्म कभी भी सुबह जल्दी या सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाता। पितरों के लिए भोजन और तर्पण का सर्वश्रेष्ठ समय हमेशा दोपहर का कुतुप एवं रौहिण मुहूर्त (लगभग 11:45 AM से 01:30 PM के मध्य) ही होता है।
  • 7. घर में कलह, असत्य और कटु वचनों से बचें:जिस घर में पितृ पक्ष के दौरान माता-पिता, बुजुर्गों अथवा स्त्रियों का अपमान होता है, वहां पितर जल और तर्पण स्वीकार किए बिना ही अतृप्त लौट जाते हैं। परिवार में शांति, संयम और मधुर वाणी बनाए रखें।

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 03 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शनिवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: सप्तमी (पूर्वाह्न 10:34 AM तक, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: सप्तमी श्राद्ध (पूर्वाह्न), अष्टमी श्राद्ध / महालक्ष्मी व्रत पूर्ण (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: आर्द्रा (प्रातः 06:18 AM तक, उपरांत पुनर्वसु नक्षत्र)
  • योग: परिघ (प्रातः 06:21 AM तक, उपरांत शिव योग)
  • करण: बव (पूर्वाह्न 10:34 AM तक), बालव (रात्रि 09:22 PM तक, उपरांत कौलव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:15 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:06 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 11:51 PM
  • चन्द्रास्त: दोपहर 01:29 PM (04 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मिथुन (रात्रि 11:42 PM तक, उपरांत कर्क)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:07 PM से 02:55 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:33 PM से 01:20 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:20 PM से 03:28 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 01:36 AM से 03:07 AM (04 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 09:13 AM से 10:41 AM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 01:38 PM से 03:07 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 06:15 AM से 07:44 AM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

मातृ नवमी 2026: माता, दादी और कुल की स्त्रियों के श्राद्ध का महत्व, पूजन विधि और अखंड सौभाग्य के उपाय

सनातन परंपरा में आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को ‘मातृ नवमी’ के नाम से जाना जाता है। इसे अविधवा नवमी भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह तिथि परिवार की दिवंगत माताओं, दादियों, सास और कुल की समस्त पूजनीय स्त्रियों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध कुल की नारियों की आत्मा को परम तृप्ति प्रदान करता है और उनके आशीर्वाद से घर में अखंड सौभाग्य, वंश वृद्धि और संतान का कल्याण होता है।

मातृ नवमी पर किसका श्राद्ध किया जाता है?

  • दिवंगत माताओं और पूर्वज स्त्रियों का: जिन माताओं या कुल की स्त्रियों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, या जिनकी मृत्यु किसी भी महीने की नवमी तिथि को हुई हो, उन सभी का श्राद्ध मातृ नवमी को ही करने का विधान है।
  • सौभाग्यवती स्त्रियों के निमित्त: यदि किसी स्त्री का देहावसान उनके पति के रहते (सुहागिन रूप में) हुआ हो, तो उनके निमित्त इस दिन किया गया श्राद्ध अक्षय फलदायी होता है।

मातृ नवमी श्राद्ध की सरल वैदिक विधि

  • प्रातः संकल्प एवं सात्विक भोजन: सुबह स्नान कर स्वच्छ श्वेत या हल्के पीले वस्त्र धारण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूर्वज माताओं का स्मरण कर हाथ में जल, अक्षत और तिल लेकर संकल्प लें।
  • खीर और पूड़ी का विशेष भोग: मातृ नवमी के दिन घर में खीर, पूड़ी और सात्विक मिष्ठान्न अवश्य तैयार करना चाहिए।
  • पंचबली भोग: भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले 5 पत्तों पर गाय, कुत्ते, कौवे, देवगण और चींटियों के लिए ग्रास निकालें।
  • ब्राह्मणी या सुहागिन स्त्री को भोजन एवं सुहाग सामग्री दान: इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण परिवार की सात्विक ब्राह्मणी अथवा किसी सौभाग्यवती स्त्री को आदरपूर्वक भोजन कराएं। भोजनोपरांत उन्हें दक्षिणा के साथ लाल वस्त्र, रोली, चूड़ियां, बिंदी और फल-मिष्ठान्न भेंट कर चरण स्पर्श करें।

मातृ नवमी के दिन क्या लाभ मिलते हैं?

  • मातृ ऋण से मुक्ति: शास्त्रों में माता का ऋण सबसे बड़ा माना गया है। इस दिन श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से मातृ दोष का निवारण होता है।
  • पारिवारिक क्लेश की समाप्ति: यदि परिवार में महिलाओं के बीच तनाव या अशांति रहती हो, तो पूर्वज माताओं के आशीर्वाद से घर में स्नेह और सौहार्द का वातावरण बनता है।
  • संतान सुख एवं विद्या वृद्धि: माताओं की आत्मा तृप्त होने पर संतान के स्वास्थ्य, विद्या और करियर की बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 02 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शुक्रवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: षष्ठी (दोपहर 12:47 PM तक, इसके बाद सप्तमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: षष्ठी श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: मृगशिरा (प्रातः 05:43 AM तक, उपरांत आर्द्रा नक्षत्र)
  • योग: वरीयान (प्रातः 05:32 AM तक, उपरांत परिघ योग)
  • करण: वणिज (दोपहर 12:47 PM तक), विष्टि/भद्रा (रात्रि 11:28 PM तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:14 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:07 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 10:57 PM
  • चन्द्रास्त: दोपहर 12:30 PM (03 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मिथुन

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:08 PM से 02:56 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:33 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:33 PM से 01:21 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:21 PM से 03:30 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 12:54 AM से 02:22 AM (03 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:10 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 03:08 PM से सायं 04:37 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:43 AM से 09:12 AM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 01 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: गुरुवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: पंचमी (दोपहर 02:49 PM तक, इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ)
  • विशेष: पंचमी श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: रोहिणी (प्रातः 07:11 AM तक, उपरांत मृगशिरा नक्षत्र)
  • योग: सिद्धि (प्रातः 08:15 AM तक, उपरांत व्यतीपात योग)
  • करण: तैतिल (प्रातः 05:14 AM तक), गर (दोपहर 02:49 PM तक, उपरांत वणिज)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:14 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:08 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 10:05 PM
  • चन्द्रास्त: पूर्वाह्न 11:28 AM (02 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: वृषभ (सायं 06:12 PM तक, उपरांत मिथुन)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:34 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:09 PM से 02:57 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:46 AM से दोपहर 12:34 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:34 PM से 01:21 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:21 PM से 03:32 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 01:45 AM से 03:12 AM (02 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:39 PM से 03:09 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 06:14 AM से 07:43 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 09:12 AM से 10:41 AM तक

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Uncategorized, पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 30 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: बुधवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: चतुर्थी (सायं 04:38 PM तक, इसके बाद पंचमी तिथि आरंभ)
  • विशेष: चतुर्थी श्राद्ध (पितृ पक्ष), संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत
  • नक्षत्र: कृतिका (प्रातः 08:32 AM तक, उपरांत रोहिणी नक्षत्र)
  • योग: वज्र (पूर्वाह्न 10:48 AM तक, उपरांत सिद्धि योग)
  • करण: बालव (प्रातः 06:21 AM तक), कौलव (सायं 04:38 PM तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:13 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:09 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 09:18 PM
  • चन्द्रास्त: प्रातः 10:24 AM (01 अक्टूबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: वृषभ

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं (बुधवार को अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं होता)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:10 PM से 02:58 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:47 AM से दोपहर 12:35 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:35 PM से 01:22 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:22 PM से 03:35 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 02:08 AM से 03:39 AM (01 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 12:11 PM से 01:40 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 07:42 AM से 09:12 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:11 PM तक

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ज्योतिष एवं समाधान

पितृ पक्ष में किन 5 चीजों का दान बदल सकता है भाग्य? जानें पितृ दोष शांति और महादान के गुप्त नियम

गरुड़ पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में किया गया दान सीधे पूर्वजों की आत्मा को तृप्त करता है और साधक के जीवन के अनेक संचित प्रारब्ध दोषों को शांत कर देता है। दान केवल धन देना नहीं, बल्कि सही भावना, उपयुक्त पात्र और शास्त्रोक्त वस्तुओं के चयन से जुड़ा वैदिक कर्म है। यदि कुंडली में पितृ दोष, कालसर्प या गुरु चांडाल जैसे योगों के कारण करियर या पारिवारिक सुख में रुकावटें आ रही हों, तो श्राद्ध पक्ष के दौरान किए गए विशेष दान जन्म-जन्मांतर के संकटों को समाप्त कर देते हैं।

पितृ पक्ष के 5 सर्वश्रेष्ठ महादान और उनके ज्योतिषीय फल

1. काले तिल का दान (राहु-केतु और शनि की शांति):

काले तिल को भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न माना गया है। पितृ तर्पण में तिल की उपस्थिति नकारात्मक शक्तियों और असुरों से रक्षा करती है। काले तिल का दान करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु जनित आकस्मिक कष्टों में त्वरित राहत मिलती है।

2. गुड़ और गाय का शुद्ध घी (सूर्य और गुरु की अनुकूलता):

गुड़ का दान सूर्य देव को बलवान बनाकर समाज में मान-सम्मान और पिता से मधुर संबंध स्थापित करता है। वहीं, गाय के शुद्ध घी का दान करने से देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं, जिससे संतान के करियर में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में संपन्नता बढ़ती है।

3. चांदी का दान (पितरों को परम तृप्ति और चंद्र दोष निवारण):

श्राद्ध कर्म में चांदी का विशेष महत्व है। पितरों को चांदी का पात्र या छोटी सी चांदी की वस्तु दान करने से चंद्रमा की स्थिति सुधरती है, जिससे मानसिक अवसाद, अनिद्रा और व्यर्थ के भय से मुक्ति मिलती है।

4. अन्न एवं नमक का दान (दरिद्रता नाशक):

कच्चा अन्न (गेहूं, चावल, दाल) और सेंधा नमक का दान सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना जाता है। नमक के दान से यमराज के भय और अकाल मृत्यु के योग टलते हैं, तथा परिवार में कभी अन्न-धन का अभाव नहीं रहता।

5. गो-सेवा अथवा गोदान (समस्त तीर्थों का फल):

गाय में तैंतीस कोटि देवताओं के साथ समस्त पितरों का वास माना गया है। श्राद्ध पक्ष में किसी गोशाला में जाकर गायों को हरा चारा, गुड़ खिलाना या प्रत्यक्ष गोदान का संकल्प लेना वैतरणी नदी पार कराने और पितृ मोक्ष का अचूक साधन है।

दान करते समय ध्यान रखें ये 3 वैदिक नियम

दक्षिण दिशा की ओर मुख: पितरों के निमित्त कोई भी दान संकल्प लेते समय अपना मुख दक्षिण दिशा की ओर रखें।

हथेली में कुश और जल: बिना संकल्प के दिया गया दान साधारण माना जाता है; हाथ में जल, अक्षत और कुश लेकर पूर्वज का गोत्र व नाम बोलकर ही दान अर्पित करें।

सच्चा पात्र: दान हमेशा किसी सात्विक, वेदपाठी ब्राह्मण, असहाय व्यक्ति या गोशाला में ही देना चाहिए।

पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों के निमित्त विशेष दान एवं गो-सेवा संकल्प करवाएँ

क्या आप समय के अभाव या दूरी के कारण विधिपूर्वक दान और ब्राह्मण भोज संपन्न नहीं करा पा रहे हैं? अपने नाम, गोत्र और पूर्वज की स्मृति में योग्य वैदिक आचार्यों द्वारा गो-सेवा, अन्नदान, वस्त्रदान अथवा श्रीमद्भगवद्गीता पाठ का संपूर्ण संकल्प कराने हेतु हमसे संपर्क करें।

💬 पंडित जी से पितृ दान संकल्प करवाएँ

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पंचांग: 29 सितंबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: मंगलवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: तृतीया (सायं 06:12 PM तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ)
  • विशेष: तृतीया श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: भरणी (प्रातः 09:42 AM तक, उपरांत कृतिका नक्षत्र)
  • योग: हर्षण (दोपहर 01:10 PM तक, उपरांत वज्र योग)
  • करण: विष्टि/भद्रा (प्रातः 07:18 AM तक), बव (सायं 06:12 PM तक, उपरांत बालव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:12 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:10 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 08:35 PM
  • चन्द्रास्त: प्रातः 09:18 AM (30 सितंबर)
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: मेष (अपराह्न 03:32 PM तक, उपरांत वृषभ)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:47 AM से दोपहर 12:35 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:47 AM से दोपहर 12:35 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:35 PM से 01:23 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:23 PM से 03:38 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 03:10 PM से सायं 04:40 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 09:12 AM से 10:42 AM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:11 PM से 01:41 PM तक

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पितृ पक्ष 2026: तिथि भूल गए हैं तो कब करें श्राद्ध? जानें पंचबली भोग का नियम और श्राद्ध का सही समय

सनातन धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाला 16 दिनों का काल ‘पितृ पक्ष’ कहलाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस काल में यमलोक से पितरों को अपने परिजनों से मिलने की अनुमति मिलती है। जो जातक इस अवधि में श्रद्धा और विधिपूर्वक अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण व पिंडदान करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि, दीर्घायु और संतान सुख की वृद्धि होती है।

श्राद्ध का सर्वश्रेष्ठ समय: कुतुप और रौहिण मुहूर्त

शास्त्रों में श्राद्ध कर्म कभी भी प्रातःकाल या रात्रि में करने का निषेध है। पितरों के निमित्त कर्म हमेशा दोपहर के समय ही फलदायी होते हैं:

  • कुतुप मुहूर्त (पूर्वाह्न 11:48 AM से 12:36 PM): दिन का आठवां मुहूर्त कुतुप कहलाता है। यह श्राद्ध और तर्पण का सबसे उत्तम समय माना जाता है।
  • रौहिण मुहूर्त (दोपहर 12:36 PM से 01:24 PM): कुतुप के बाद का समय रौहिण मुहूर्त कहलाता है, जिसमें पिंडदान और ब्राह्मण भोज कराया जाता है।
  • अपराह्न काल: दोपहर 01:24 PM से 03:30 PM के मध्य सभी तर्पण और दान कार्य पूर्ण कर लेने चाहिए।

यदि पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो क्या करें?

कई बार लोगों को अपने माता-पिता या पूर्वजों की सटीक तिथि ज्ञात नहीं होती। इसके लिए शास्त्रों में विशेष व्यवस्था दी गई है:

  • माता का श्राद्ध: माता, दादी या किसी भी स्त्री पितर की तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध नवमी तिथि (मातृ नवमी) को करना चाहिए।
  • अकाल मृत्यु: दुर्घटना, अस्त्र-शस्त्र या विष आदि से हुई मृत्यु का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।
  • सर्वपितृ अमावस्या: जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि बिल्कुल ज्ञात न हो, या किसी कारणवश आप उनकी निश्चित तिथि पर श्राद्ध न कर पाए हों, तो उनका श्राद्ध आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) को करने से पितर पूर्ण तृप्त होते हैं।

पंचबली भोग: श्राद्ध का सबसे अनिवार्य अंग

श्राद्ध के दिन ब्राह्मण भोजन से पूर्व भोजन में से 5 हिस्से पत्ते पर अलग निकालने का विधान है, जिसे ‘पंचबली’ कहा जाता है:

  1. गोबली (गाय के लिए): गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, यह पहला ग्रास पापों का नाश करता है।
  2. श्वानबली (कुत्ते के लिए): यमराज के दूत स्वरूप श्वान को भोजन अर्पित करने से पितृ मार्ग सुगम होता है।
  3. काकबली (कौवे के लिए): कौवे को यम और पितरों का संदेशवाहक माना जाता है।
  4. देवादिबली (देवताओं के लिए): समस्त वेदों और देवताओं की तृप्ति के लिए निकाला गया भाग।
  5. पिपीलिकादिबली (चींटियों के लिए): सूक्ष्म जीवों और कीट-पतंगों के उद्धार के लिए भोजन का अंतिम भाग भूमि पर रखा जाता है।

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