पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 13 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: मंगलवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: तृतीया (दोपहर 03:12 PM तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि तीसरा दिन (माँ चंद्रघंटा पूजन), सिन्दूर तृतीया
  • नक्षत्र: विशाखा (दोपहर 03:48 PM तक, उपरांत अनुराधा नक्षत्र)
  • योग: आयुष्मान (सायं 04:12 PM तक, उपरांत सौभाग्य योग)
  • करण: गर (दोपहर 03:12 PM तक), वणिज (अर्धरात्रि 02:28 AM, 14 अक्टूबर तक, उपरांत विष्टि/भद्रा)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:21 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:55 PM
  • चन्द्रोदय: प्रातः 09:47 AM
  • चन्द्रास्त: रात्रि 08:42 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: तुला (प्रातः 09:40 AM तक, उपरांत वृश्चिक)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:02 PM से 02:47 PM तक
  • अमृत काल: पूर्वाह्न 11:15 AM से दोपहर 12:48 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 03:01 PM से सायं 04:28 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 09:15 AM से 10:42 AM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:08 PM से 01:35 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 12 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: सोमवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: द्वितीया (सायं 04:32 PM तक, इसके बाद तृतीया तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि द्वितीय दिवस (माँ ब्रह्मचारिणी पूजन), सोमवार व्रत
  • नक्षत्र: स्वाति (दोपहर 02:50 PM तक, उपरांत विशाखा नक्षत्र)
  • योग: प्रीति (सायं 05:08 PM तक, उपरांत आयुष्मान योग)
  • करण: कौलव (सायं 04:32 PM तक), उपरांत तैतिल (अर्धरात्रि 03:52 AM, 13 अक्टूबर तक, उपरांत गर)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:21 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:56 PM
  • चन्द्रोदय: प्रातः 08:48 AM
  • चन्द्रास्त: सायं 07:58 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: तुला

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:02 PM से 02:48 PM तक
  • अमृत काल: प्रातः 06:18 AM से 07:52 AM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 07:48 AM से 09:15 AM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 10:42 AM से दोपहर 12:09 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 01:36 PM से 03:03 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 11 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: रविवार
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: प्रतिपदा (सायं 05:42 PM तक, इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ)
  • विशेष: शारदीय नवरात्रि आरंभ, घटस्थापना (कलश स्थापना), माँ शैलपुत्री पूजन
  • नक्षत्र: चित्रा (दोपहर 01:35 PM तक, उपरांत स्वाति नक्षत्र)
  • योग: विष्कुम्भ (सायं 06:14 PM तक, उपरांत प्रीति योग)
  • करण: किस्तुघ्न (प्रातः 06:48 AM तक), बव (सायं 05:42 PM तक, उपरांत बालव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:20 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:57 PM
  • चन्द्रोदय: प्रातः 07:48 AM
  • चन्द्रास्त: सायं 07:18 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: तुला (प्रातः 07:12 AM पर प्रवेश)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • घटस्थापना (कलश स्थापना) मुहूर्त: प्रातः 06:20 AM से 10:14 AM तक (शुभ चौघड़िया व लग्न)
  • अभिजीत मुहूर्त (घटस्थापना हेतु श्रेष्ठ): पूर्वाह्न 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:03 PM से 02:49 PM तक
  • अमृत काल: रात्रि 08:12 PM से 09:44 PM तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): सायं 04:29 PM से 05:57 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 12:08 PM से 01:35 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 03:02 PM से 04:29 PM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

सर्वपितृ अमावस्या 2026: तिथि भूल गए हों तो इस दिन करें सभी पितरों का श्राद्ध, जानें तर्पण विधि और 16 दीपकों का रहस्य

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ‘सर्वपितृ अमावस्या’, ‘पितृ विसर्जनी अमावस्या’ अथवा ‘महालय अमावस्या’ कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, 16 दिनों तक भूलोक पर परिजनों के बीच रहने के बाद इस दिन समस्त पितर अपने लोक (पितृ लोक) के लिए प्रस्थान करते हैं। यदि पूरे पितृ पक्ष में किसी कारणवश आप अपने पितरों का श्राद्ध या तर्पण न कर पाए हों, या पूर्वजों की निश्चित मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो केवल सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध कुल के सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों को पूर्ण तृप्ति प्रदान करता है।

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध का महत्व: जब कोई तिथि ज्ञात न हो

शास्त्रों में इस दिन को ‘सर्व मोक्षदायिनी अमावस्या’ माना गया है:

  • सभी पितरों का संयुक्त श्राद्ध: माता, पिता, दादा-दादी, नाना-नानी अथवा कुल के ऐसे पूर्वज जिनकी मृत्यु तिथि याद नहीं है, उन सभी का श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
  • भूल-चूक की क्षमा: यदि पितृ पक्ष की किसी निश्चित तिथि पर श्राद्ध करने में कोई त्रुटि रह गई हो, तो अमावस्या के दिन तर्पण व दान करने से पितर प्रसन्न होकर सभी दोष क्षमा कर देते हैं।
  • पितृ विसर्जन का दिन: इस दिन पितर विदा होते हैं, इसलिए इस दिन किया गया तर्पण उन्हें विदाई का पाथेय (मार्ग का संबल) प्रदान करता है।

श्राद्ध एवं तर्पण का शास्त्रोक्त समय

सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म दोपहर के समय ही संपन्न करना चाहिए:

  • कुतुप मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक (श्राद्ध संकल्प व तर्पण का श्रेष्ठ समय)
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 PM से 01:17 PM तक (ब्राह्मण भोजन व पिंडदान का समय)
  • अपराह्न काल: दोपहर 01:17 PM से 03:20 PM तक (दान व विसर्जन संपन्न करने का समय)

सर्वपितृ अमावस्या की सरल एवं अचूक पूजन विधि

  1. प्रातः स्नान एवं संकल्प: सुबह पवित्र नदी में स्नान करें अथवा घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। श्वेत वस्त्र धारण कर पूर्वजों का स्मरण करें।
  2. जलांजलि एवं तर्पण: दोपहर के समय तांबे के लोटे में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, काले तिल, जौ और अक्षत मिलाएं। हाथ में कुशा धारण कर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के निमित्त कम से कम तीन बार अंजलि से जल अर्पित करें।
  3. पंचबली भोग: ब्राह्मण भोजन से पूर्व भोजन में से 5 भाग (पूरी-खीर) पत्तल पर निकालें—पहला गाय (गोबली), दूसरा कुत्ते (श्वानबली), तीसरा कौवे (काकबली), चौथा देवताओं और पांचवां भाग चींटियों (पिपीलिकादि) के लिए निकालें।
  4. ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा: किसी योग्य सात्विक ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र, अनाज व सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा भेंट कर चरण स्पर्श करें।

संध्याकाल में पितृ विसर्जन: 16 दीपकों का विधान

सर्वपितृ अमावस्या की शाम को पितरों की सुखद विदाई के लिए दीपदान का विशेष महत्व है:

  • सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वार पर, पीपल के वृक्ष के नीचे और तुलसी के पास दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाएं।
  • कई परंपराओं में 16 दिनों के प्रतीक स्वरूप 16 दीपक जलाने का विधान है।
  • मान्यता है कि अमावस्या की घनी रात्रि में पितर अपने लोक लौटते हैं; दक्षिण दिशा में जलाया गया दीपक उनके मार्ग को आलोकित करता है और वे संतुष्ट होकर वंश को दीर्घायु, यश और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या पर महातर्पण एवं पितृ दोष निवारण संकल्प करवाएँ

सर्वपितृ अमावस्या वर्ष का वह अंतिम अवसर है जब आप अपने समस्त ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के निमित्त विशेष तर्पण, गीता पाठ और ब्राह्मण भोजन का संकल्प ले सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष के कारण उन्नति बाधित हो रही है, तो योग्य वैदिक आचार्यों द्वारा अपने नाम और गोत्र से संपूर्ण महापूजा संपन्न कराने हेतु संपर्क करें।

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 09 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: शुक्रवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: चतुर्दशी (रात्रि 08:26 PM तक, इसके बाद सर्वपितृ अमावस्या तिथि आरंभ)
  • विशेष: चतुर्दशी श्राद्ध (अकाल मृत्यु, दुर्घटना, शस्त्राघात से मृत पितरों का श्राद्ध / घात चतुर्दशी)
  • नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी (पूर्वाह्न 11:48 AM तक, उपरांत हस्त नक्षत्र)
  • योग: ऐन्द्र (रात्रि 08:35 PM तक, उपरांत वैधृति योग)
  • करण: बालव (प्रातः 08:52 AM तक), कौलव (रात्रि 08:26 PM तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:19 AM
  • सूर्यास्त: सायं 05:59 PM
  • चन्द्रोदय: प्रातः 05:52 AM (10 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: सायं 06:28 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: कन्या

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 PM से 02:50 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:31 PM से 01:17 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:17 PM से 03:20 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 04:15 AM से 05:48 AM (10 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:09 PM तक
  • यमगण्ड: दोपहर 03:03 PM से सायं 04:31 PM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 07:46 AM से 09:14 AM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 08 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: गुरुवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: त्रयोदशी (रात्रि 09:24 PM तक, इसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ)
  • विशेष: त्रयोदशी श्राद्ध (काकबली/मघा त्रयोदशी), गुरु प्रदोष व्रत
  • नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी (प्रातः 10:18 AM तक, उपरांत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र)
  • योग: ब्रह्म (रात्रि 09:12 PM तक, उपरांत ऐन्द्र योग)
  • करण: वणिज (प्रातः 10:04 AM तक), विष्टि/भद्रा (रात्रि 09:24 PM तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:18 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:00 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 04:47 AM (09 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: सायं 05:43 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: सिंह (सायं 04:48 PM तक, उपरांत कन्या)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:04 PM से 02:51 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:31 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:31 PM से 01:17 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:17 PM से 03:21 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 03:18 AM से 04:52 AM (09 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 01:36 PM से 03:04 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 06:18 AM से 07:46 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 09:14 AM से 10:41 AM तक

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पंचांग: 07 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: बुधवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: द्वादशी (रात्रि 10:50 PM तक, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ)
  • विशेष: द्वादशी श्राद्ध (सन्यासी/यति श्राद्ध), इन्दिरा एकादशी व्रत पारण
  • नक्षत्र: मघा (प्रातः 09:05 AM तक, उपरांत पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र)
  • योग: शुक्ल (रात्रि 10:52 PM तक, उपरांत ब्रह्म योग)
  • करण: तैतिल (पूर्वाह्न 11:38 AM तक), गर (रात्रि 10:50 PM तक, उपरांत वणिज)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:17 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:01 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 03:45 AM (08 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: सायं 04:58 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: सिंह

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं (बुधवार को अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं होता)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:05 PM से 02:51 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:32 PM से 01:18 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:18 PM से 03:22 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 01:12 AM से 02:44 AM (08 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 12:09 PM से 01:37 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 07:45 AM से 09:13 AM तक
  • गुलिक काल: प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:09 PM तक

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पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 06 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: मंगलवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: एकादशी (अर्धरात्रि 12:35 AM, 07 अक्टूबर तक, इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ)
  • विशेष: इन्दिरा एकादशी व्रत, एकादशी श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: आश्लेषा (प्रातः 08:12 AM तक, उपरांत मघा नक्षत्र)
  • योग: शुभ (अर्धरात्रि 12:58 AM, 07 अक्टूबर तक, उपरांत शुक्ल योग)
  • करण: बालव (दोपहर 01:38 PM तक), कौलव (अर्धरात्रि 12:35 AM, 07 अक्टूबर तक, उपरांत तैतिल)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:17 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:02 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 02:44 AM (07 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: दोपहर 04:11 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: कर्क (प्रातः 08:12 AM तक, उपरांत सिंह)

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक (दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:05 PM से 02:52 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:32 PM से 01:19 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:19 PM से 03:24 PM तक
  • अमृत काल: रात्रि 10:48 PM से 12:21 AM (07 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): दोपहर 03:06 PM से सायं 04:34 PM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 09:13 AM से 10:41 AM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 12:10 PM से 01:38 PM तक

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धार्मिक ज्ञान एवं पर्व

इन्दिरा एकादशी 2026: पितरों को मोक्ष दिलाने वाला महाव्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथा

सनातन धर्म में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘इन्दिरा एकादशी’ कहा जाता है। यह एकादशी पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के मध्य में आती है, जिस कारण इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अन्य सभी एकादशियों से कहीं अधिक बढ़ जाता है। भविष्य पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, यदि किसी कारणवश परिवार का कोई पूर्वज अपने कर्मों के फल स्वरूप यमलोक अथवा अधोगति (कष्टकारी योनि) में भटक रहा हो, तो उसके वंशज द्वारा विधिपूर्वक इन्दिरा एकादशी का व्रत रखने और उसका पुण्य फल पितरों को समर्पित करने से उन्हें तत्काल मुक्ति प्राप्त होकर वैकुंठ की प्राप्ति होती है।

इन्दिरा एकादशी की सरल पूजन एवं तर्पण विधि

  • दशमी तिथि की सात्विकता: एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि की संध्या से ही आरंभ हो जाते हैं। दशमी के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन न करें और मन में सात्विक विचार रखें।
  • प्रातः संकल्प एवं शालिग्राम पूजन: एकादशी की सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर भगवान श्रीहरि विष्णु अथवा शालिग्राम जी के सम्मुख घी का दीपक प्रज्वलित करें। हाथ में जल, अक्षत और तुलसी दल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु को भोग एवं तुलसी दल: भगवान विष्णु को पंचामृत, पीले पुष्प, मौसमी फल और पंजीरी अर्पित करें। ध्यान रखें कि भगवान विष्णु के भोग में तुलसी पत्र अवश्य शामिल हो, किंतु एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें (उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें)।
  • पितरों के निमित्त तर्पण एवं पिंडदान: दोपहर के समय (कुतुप व रौहिण मुहूर्त में) दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल, कुश और जल से पितरों का तर्पण करें। इसके बाद कहें—‘मेरे इस व्रत का समस्त पुण्य फल मेरे पूर्वजों को प्राप्त हो और उन्हें श्रीहरि के श्रीचरणों में स्थान मिले।’
  • द्वादशी के दिन पारण व ब्राह्मण भोजन: द्वादशी के दिन प्रातः पुनः स्नान-पूजन कर किसी सात्विक ब्राह्मण को भोजन कराएं, दक्षिणा दें और उसके पश्चात ही स्वयं व्रत का पारण करें।

इन्दिरा एकादशी की संक्षिप्त पौराणिक व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में माहिष्मती नगरी के धर्मपरायण राजा इंद्रसेन के सामने एक दिन देवर्षि नारद प्रकट हुए। नारद जी ने बताया कि यमलोक यात्रा के दौरान वे राजा के दिवंगत पिता से मिले, जो अपने पूर्व जन्म के किसी दोष के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं।

पिता ने नारद जी के माध्यम से अपने पुत्र इंद्रसेन को संदेश भेजा था कि यदि उनका पुत्र आश्विन कृष्ण पक्ष की इन्दिरा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत रखे और उसका पुण्य फल उन्हें दान कर दे, तो उन्हें यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिलकर स्वर्ग की प्राप्ति होगी। राजा इंद्रसेन ने महर्षि नारद द्वारा बताई गई संपूर्ण विधि से इन्दिरा एकादशी का व्रत रखा और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर पुण्य अपने पिता को समर्पित किया। इसके प्रभाव से राजा के पिता दिव्य विमान में बैठकर सीधे वैकुंठ धाम को प्रस्थान कर गए।

इस दिन किए जाने वाले 4 विशेष पुण्य उपाय

  • 1. श्रीमद्भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ: इन्दिरा एकादशी के दिन गीता के ग्यारहवें अध्याय (विश्वरूप दर्शन योग) का पाठ कर उसका पुण्य अपने पितरों को अर्पित करने से बड़े से बड़ा पितृ दोष शांत होता है।
  • 2. पीपल वृक्ष की परिक्रमा: दोपहर से पूर्व पीपल के वृक्ष में कच्चा दूध और जल अर्पित कर 7 बार परिक्रमा करें। सायंकाल पीपल की जड़ के पास गाय के घी का दीपक जलाएं।
  • 3. गो-सेवा और हरा चारा दान: इस दिन किसी गोशाला में जाकर गायों को हरा चारा, गुड़ और भीगी हुई चना दाल खिलाएं।
  • 4. विष्णु सहस्रनाम का जप: परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के लिए ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करें अथवा ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की 5 माला जपें।

इन्दिरा एकादशी 2026: पितरों को मोक्ष दिलाने वाला महाव्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और व्रत कथा Read Post »

पंचांग एवं मुहूर्त

पंचांग: 05 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली)

  • वार: सोमवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • माह: आश्विन
  • तिथि: नवमी (प्रातः 05:32 AM तक), उपरांत दशमी तिथि (अर्धरात्रि 02:49 AM, 06 अक्टूबर तक, इसके बाद एकादशी आरंभ)
  • विशेष: दशमी श्राद्ध (पितृ पक्ष)
  • नक्षत्र: पुष्य (प्रातः 07:34 AM तक, उपरांत आश्लेषा नक्षत्र)
  • योग: सिद्ध (प्रातः 06:46 AM तक), उपरांत साध्य योग (अर्धरात्रि 03:26 AM, 06 अक्टूबर तक, इसके बाद शुभ योग)
  • करण: वणिज (सायं 04:13 PM तक), विष्टि/भद्रा (अर्धरात्रि 02:49 AM, 06 अक्टूबर तक, उपरांत बव)

सूर्योदय एवं सूर्यास्त

  • सूर्योदय: प्रातः 06:16 AM
  • सूर्यास्त: सायं 06:03 PM
  • चन्द्रोदय: रात्रि 01:45 AM (06 अक्टूबर)
  • चन्द्रास्त: दोपहर 03:20 PM
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चन्द्र राशि: कर्क

शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ शुभ समय)
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:06 PM से 02:53 PM तक
  • कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): पूर्वाह्न 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक
  • रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 12:32 PM से 01:19 PM तक
  • अपराह्न काल (श्राद्ध कार्य): दोपहर 01:19 PM से 03:25 PM तक
  • अमृत काल: अर्धरात्रि 12:12 AM से 01:41 AM (06 अक्टूबर) तक
  • राहुकाल (अशुभ समय): प्रातः 07:44 AM से 09:13 AM तक
  • यमगण्ड: प्रातः 10:41 AM से दोपहर 12:10 PM तक
  • गुलिक काल: दोपहर 01:38 PM से 03:07 PM तक

पंचांग: 05 अक्टूबर 2026 (नई दिल्ली) Read Post »

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