भाद्रपद पूर्णिमा 2026: सत्यनारायण पूजन विधि, चंद्र अर्घ्य का समय और माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 4 उपाय

सनातन परंपरा में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि चातुर्मास के पावन नियमों के अंतर्गत आती है […]

सनातन परंपरा में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह तिथि चातुर्मास के पावन नियमों के अंतर्गत आती है और इसी दिन से पितृ पक्ष के श्राद्ध कर्मों की शुरुआत भी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है। इस पावन दिन भगवान श्री सत्यनारायण और माता महालक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करने से घर में संचित धन की वृद्धि होती है, मानसिक तनाव दूर होता है और परिवार में सुख-शांति का स्थायी वास होता है।

भाद्रपद पूर्णिमा की सरल पूजन विधि

प्रातः संकल्प एवं स्नान: सुबह पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान करें और पीले या श्वेत सात्विक वस्त्र धारण कर व्रत/पूजन का संकल्प लें।

भगवान सत्यनारायण पूजन: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पंचामृत, मौसमी फल, पंजीरी का प्रसाद और तुलसी दल अर्पित करें। इसके पश्चात श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण या पाठ करें।

संध्या समय चंद्र देव को अर्घ्य: शाम को चंद्रोदय के समय एक चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, जल, अक्षत और सफेद पुष्प मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय 'ॐ सों सोमाय नमः' मंत्र का 11 बार जप करें।

पूर्णिमा श्राद्ध का महत्व: जिन पूर्वजों का देहावसान किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध और तर्पण आज के दिन करने का विधान है।

1. मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का छिड़काव: पूर्णिमा के दिन प्रातः मुख्य द्वार की सफाई कर हल्दी मिले जल का छिड़काव करें। इससे घर के भीतर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुकता है।

2. माँ लक्ष्मी को कौड़ी और खीर का भोग: सायंकाल लक्ष्मी जी के समक्ष गाय के घी का अखंड दीपक जलाएं और मखाने व दूध की खीर का भोग लगाएं। साथ ही 5 पीली कौड़ियां पूजन में रखकर अगले दिन अपनी तिजोरी में रख लें।

3. पीपल वृक्ष पर जल अर्पण: पूर्णिमा के दिन दोपहर से पूर्व पीपल के वृक्ष में जल, कच्चा दूध और बताशा अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन पीपल पर माँ लक्ष्मी का वास रहता है।

4. मानसिक शांति के लिए चंद्र दर्शन: जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित है, उन्हें आज रात्रि में कम से कम 15 से 20 मिनट चंद्रमा की रोशनी में बैठना चाहिए और चांदी के पात्र से जल पीना चाहिए।

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