शरद पूर्णिमा 2026: अमृत वर्षा की रात्रि, कोजागरी लक्ष्मी पूजा विधि, खुले आसमान में खीर रखने का सही समय और धन वर्षा के अचूक उपाय

सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम […]

सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अपनी शीतल एवं अमृतमयी किरणों की वर्षा करता है।

धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन रात्रि को माता महालक्ष्मी स्वयं बैकुंठ लोक से पृथ्वी पर उतरती हैं और घर-घर जाकर यह देखती हैं कि—“को जाग्रति?” (अर्थात, कौन जाग रहा है?)। जो जातक इस रात्रि में जागकर माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की उपासना करते हैं, उनके घर में दरिद्रता का समूल नाश होकर अटूट धन-धान्य और ऐश्वर्य का वास होता है। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण ने भी इसी दिव्य रात्रि को वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था।

शरद पूर्णिमा 2026: शुभ तिथि एवं मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 24 अक्टूबर 2026, सायं 07:54 PM से
  • पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 25 अक्टूबर 2026, सायं 05:23 PM तक
  • चंद्रोदय समय (24 अक्टूबर): सायं 05:58 PM
  • कोजागरी लक्ष्मी पूजन एवं निशीथ काल मुहूर्त: रात्रि 11:40 PM से 12:31 AM (25 अक्टूबर मध्यरात्रि)
  • चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का समय: 24 अक्टूबर रात्रि 09:00 PM से लेकर मध्यरात्रि 01:00 AM के मध्य

(शास्त्रानुसार शरद पूर्णिमा की रात्रि व्यापिनी साधना, कोजागरी जागरण और खुले आकाश के नीचे अमृतमयी खीर रखने का विधान 24 अक्टूबर की रात्रि को ही संपन्न किया जाएगा। स्नान-दान की पूर्णिमा 25 अक्टूबर को उदया तिथि में मान्य रहेगी।)

चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक रहस्य

शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन चंद्र किरणों में विशेष औषधीय और रसायन युक्त गुण विद्यमान होते हैं:

  1. पात्र और सामग्री का चयन: खीर सदैव गाय के शुद्ध दूध, चावल और मिश्री (या खांड) से तैयार करें। इसमें केसर और इलायची अवश्य डालें।
  2. खीर रखने की विधि: खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के खुले बर्तन में रखें। बर्तन को किसी धातु के भारी ढक्कन से न ढकें, बल्कि केवल एक महीन जालीदार छलनी या साफ सफेद सूती कपड़े से ढकें ताकि चंद्र किरणें सीधे खीर पर पड़ सकें।
  3. स्थान: इसे घर की छत, बालकनी या ऐसे खुले स्थान पर रखें जहाँ चंद्रमा की सीधी धवल रोशनी पड़ती हो।
  4. स्वास्थ्य लाभ: मध्यरात्रि के बाद अथवा अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में खाली पेट इस खीर का सेवन करने से शरीर का पित्त दोष शांत होता है, नेत्र ज्योति बढ़ती है और श्वास/दमा जनित विकारों में चमत्कारी लाभ मिलता है।

कोजागरी महालक्ष्मी पूजन विधि (सरल एवं प्रामाणिक)

  1. स्थान शुद्धि एवं चौकी: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूजा स्थल पर लाल अथवा पीले रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाएं।
  2. प्रतिमा स्थापना: भगवान श्रीहरि विष्णु और माता महालक्ष्मी की संयुक्त तस्वीर अथवा विग्रह स्थापित करें।
  3. अभिषेक व श्रृंगार: माता लक्ष्मी को गंगाजल से स्नान कराएं, लाल चुनरी, सिन्दूर, रोली, अक्षत, इत्र और सुगंधित लाल/गुलाबी कमल पुष्प अर्पित करें।
  4. दीपक प्रज्वलन: पूजा वेदी पर गाय के शुद्ध घी का एक बड़ा अखंड दीपक और चौमुखी दीपक जलाएं।
  5. मंत्र जप व स्तोत्र पाठ: इस रात्रि को ‘श्री सूक्त’, ‘कनकधारा स्तोत्र’ और ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना कई गुना अधिक फलदायी माना गया है।
    • महालक्ष्मी महामंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः॥ (कमल गट्टे की माला से 108 बार जपें)।
  6. भोग अर्पण: खीर, मखाना, बताशे और मौसमी फलों का भोग लगाएं और आरती संपन्न करें।

शरद पूर्णिमा पर धन वृद्धि के 4 अचूक उपाय

  • 1. कौड़ी और चांदी का सिक्का तिजोरी में रखें: पूजा के समय माता लक्ष्मी के चरणों में 5 पीली कौड़ियां और एक चांदी का सिक्का रखें। रात्रि जागरण के बाद अगली सुबह इन्हें एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या गल्ले में रख दें; वर्ष भर धन का अभाव नहीं होगा।
  • 2. कच्चे दूध का चंद्र अर्घ्य: रात्रि में चंद्रमा को तांबे के अलावा अन्य किसी पात्र (जैसे चांदी या पीतल) में शुद्ध जल, कच्चा गाय का दूध, सफेद चंदन और अक्षत मिलाकर ॐ सों सोमाय नमः बोलते हुए अर्घ्य दें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र ग्रह मजबूत होता है।
  • 3. अखंड सौभाग्य हेतु सुहाग दान: सुहागिन महिलाएं इस दिन संध्या काल में किसी योग्य ब्राह्मणी या वृद्ध महिला को सुहाग की वस्तुएं और खीर भेंट करें।
  • 4. तुलसी जी के समक्ष दीपदान: शरद पूर्णिमा की शाम तुलसी के पौधे के नीचे शुद्ध घी का दीपक जलाएं और 11 परिक्रमा करें, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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