पितृ पक्ष में क्या न करें? 7 प्रमुख वर्जित कार्य
- 1. मांगलिक और नए शुभ कार्यों का आरंभ न करें:पितृ पक्ष के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार अथवा नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हैं। यह समय केवल पितरों के स्मरण और आत्मशांति के लिए आरक्षित है।
- 2. तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और मदिरा का त्याग:श्राद्ध पक्ष में घर में पूर्ण सात्विकता रहनी चाहिए। मांस, मछली, मदिरा के साथ-साथ लहसुन, प्याज, मसूर की दाल, हींग, चना और बासी भोजन का प्रयोग भोजन में बिल्कुल न करें।
- 3. बाल, दाढ़ी कटवाने और नाखून काटने से बचें:जो व्यक्ति अपने पितरों का मुख्य श्राद्ध या तर्पण कर रहा हो, उसे इस अवधि में दाढ़ी-मूंछ, बाल कटवाने या नाखून काटने से बचना चाहिए। इसे शोक और संयम का प्रतीक माना गया है।
- 4. द्वार पर आए भिक्षुक, पशु या पक्षी का अनादर न करें:मान्यता है कि पितृ पक्ष में हमारे पूर्वज किसी भी रूप (कुत्ता, गाय, कौवा अथवा निर्धन याचक) में आपके द्वार पर आ सकते हैं। किसी भी जीव को दुत्कारें नहीं; उन्हें अन्न, जल या भोजन अवश्य दें।
- 5. लोहे या स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें:पितरों के तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध के भोजन में लोहे और स्टील के बर्तनों का उपयोग वर्जित माना गया है। शास्त्रों में इसके लिए तांबा, पीतल, चांदी अथवा पत्तल (पलाश/केले के पत्ते) को ही शुद्ध माना गया है।
- 6. संध्याकाल या रात्रि में श्राद्ध न करें:श्राद्ध कर्म कभी भी सुबह जल्दी या सूर्यास्त के बाद नहीं किया जाता। पितरों के लिए भोजन और तर्पण का सर्वश्रेष्ठ समय हमेशा दोपहर का कुतुप एवं रौहिण मुहूर्त (लगभग 11:45 AM से 01:30 PM के मध्य) ही होता है।
- 7. घर में कलह, असत्य और कटु वचनों से बचें:जिस घर में पितृ पक्ष के दौरान माता-पिता, बुजुर्गों अथवा स्त्रियों का अपमान होता है, वहां पितर जल और तर्पण स्वीकार किए बिना ही अतृप्त लौट जाते हैं। परिवार में शांति, संयम और मधुर वाणी बनाए रखें।



